Tuesday, March 3, 2026
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Third World War: यदि हुआ विश्वयुद्ध तो कौन किसके साथ – भारत क्या करेगा?

Third World War: क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध की दहलीज़ पर है? जानिए किस खेमे में होंगे कौन से देश और भारत की रणनीति क्या होगी..

साल 2026 की शुरुआत के साथ ही पूरी दुनिया एक ऐसे भू-राजनीतिक मोड़ पर खड़ी है जहाँ हर नया सैन्य टकराव, हर नई संधि का टूटना और हर नया प्रतिबंध एक बड़े वैश्विक संघर्ष की आशंका को और गहरा करता जा रहा है। बढ़ते युद्धों, उभरते सैन्य गुटों और परमाणु हथियार नियंत्रण समझौतों के समाप्त होने से यह सवाल अब खुलकर उठने लगा है — क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध की ओर बढ़ रही है?

और अगर ऐसा होता है, तो सबसे अहम सवाल होगा — कौन देश किसके साथ खड़ा होगा और भारत की भूमिका क्या होगी?

क्यों लगातार बढ़ रहा है वैश्विक खतरा

भले ही अभी तक किसी औपचारिक “विश्वयुद्ध” की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन ज़मीनी हालात साफ संकेत दे रहे हैं कि दुनिया धीरे-धीरे दो बड़े ध्रुवों में बंटती जा रही है।

ये जंगी चिन्गारियाँ बन सकती हैं विश्वयुद्ध की ज्वाला 

रूस-यूक्रेन युद्ध ने नाटो और रूस को सीधी टकराव की स्थिति में ला दिया है।

इजरायल-ईरान दुश्मनी और ईरान का परमाणु कार्यक्रम मध्य-पूर्व को विस्फोटक स्थिति की ओर धकेल रहा है।

फरवरी 2026 में अमेरिका-रूस के बीच न्यू स्टार्ट परमाणु संधि की समाप्ति परमाणु संतुलन को कमजोर कर रही है।

कोरियाई प्रायद्वीप पर उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

भारत-पाकिस्तान सीमा पर सैन्य सतर्कता बनी हुई है।

वहीं वेनेजुएला पर अमेरिका के बढ़ते दबाव से दक्षिण अमेरिका में भी नया तनावपूर्ण मोर्चा खुल चुका है।

इन सभी मोर्चों का आपस में जुड़ना एक बड़े वैश्विक संघर्ष की नींव तैयार करता दिख रहा है।

संभावित पश्चिमी सैन्य गठबंधन

अगर तीसरा विश्वयुद्ध शुरू होता है, तो एक बड़ा सैन्य समूह अमेरिका के नेतृत्व में खड़ा होगा। इसमें शामिल हो सकते हैं –

नाटो के सभी प्रमुख देश – ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली सहित पूरा यूरोप

एशिया-प्रशांत के रणनीतिक साझेदार – जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया

पश्चिम एशिया और एशिया में सहयोगी – इजरायल और ताइवान

यह गठबंधन तकनीकी, आर्थिक और सैन्य रूप से दुनिया का सबसे शक्तिशाली नेटवर्क माना जाएगा।

रूस-चीन के नेतृत्व वाला दूसरा ध्रुव

इसके समानांतर एक दूसरा बड़ा गुट रूस और चीन की अगुवाई में उभर सकता है। इस समूह में शामिल हो सकते हैं – रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान, बेलारूस, सीरिया, वेनेजुएला, 

पापिस्तान किसकी उंगली पकड़ेगा

हालांक पैसा दे दे कर पापिस्तान को अमेरिका ने भी जिन्दा रखा है लेकिन फितरत से गद्दार पापिस्तान चीन के साथ अपने गहरे सैन्य और आर्थिक रिश्तों के कारण ऊपर बताये गये रूस चीन वाले खेमे की ओर झुक सकता है।

भारत की रणनीति क्या होगी?

किसी भी वैश्विक युद्ध में भारत की भूमिका सबसे अधिक चर्चा का विषय होगी। भारत के किसी एक सैन्य गुट में औपचारिक रूप से शामिल होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। भारत अपनी “स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी” यानी स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखते हुए खुद को एक संतुलित लेकिन निर्णायक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश करेगा।

हालाँकि, भारत पूरी तरह निष्क्रिय नहीं रहेगा। अगर चीन या पाकिस्तान भारत की सीमाओं पर कोई आक्रामक कदम उठाते हैं, तो भारत पूरी सैन्य ताकत से जवाब देने के लिए तैयार रहेगा।

कुल मिला कर कहा जा सकता है कि 

आज की दुनिया तेज़ी से ऐसे मोड़ पर बढ़ रही है जहाँ हर नया टकराव, हर नई संधि और हर नई सैन्य तैनाती आने वाले समय की तस्वीर को और जटिल बना रही है। तीसरा विश्वयुद्ध अभी केवल एक आशंका है — लेकिन वैश्विक हालात इसे धीरे-धीरे एक वास्तविक खतरे में बदलते दिख रहे हैं।

(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)

 

 

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