Poetry by Manmeet Soni: मुझे तो कई बार डर लगने लगता है कि वामपंथी कवि कहीं यह घोषणा न कर दे : “तुम्हारी पत्नी भी तुम्हारी बहिन है”!..
Poetry by Manmeet Soni: मुझे तो कई बार डर लगने लगता है कि वामपंथी कवि कहीं यह घोषणा न कर दे : “तुम्हारी पत्नी भी तुम्हारी बहिन है”!..
Poetry by Manmeet Soni: मुझे तो कई बार डर लगने लगता है कि वामपंथी कवि कहीं यह घोषणा न कर दे : “तुम्हारी पत्नी भी तुम्हारी बहिन है”!..