T20 World Cup 2026: टीम वर्क किसे कहते हैं, आज का सेमी-फाइनल इसका सबसे सुंदर उदाहरण है..
सबसे पहले संजू सैमसन और ईशान किशन ने हमें बेहतरीन पॉवर प्ले दिया, एक ऐसा पॉवरप्ले जो आने वाले बैट्समैन के अंदर कॉन्फिडेंस भर दे।
फिर शिवम दुबे और संजू सैमसन ने क्या ताबड़तोड़ मिडल ओवर्स निकाले, वाह! मतलब इतना सही तालमेल कि स्पिनर आयेगा तो शिवम मारेगा और फ़ास्ट बॉलर को संजू तोड़ेगा। दोनों ही एक बड़े शॉट के बाद सिंगल लेकर लेफ्ट राइट कॉम्बिनेशन से बॉलर को तंग भी करते रहे।
फिर हार्दिक आया तो उसने भी स्ट्राइकिंग में कमी न छोड़ी। शिवम को रन आउट ज़रूर करवा दिया पर सही मौके पर बाउंड्री भी लीं।
वहीं तिलक वर्मा ने क्या शानदार कैमियो दिया, जो काम रिंकू के जिम्मे था, वो पॉवर फिनिशिंग, 300 के स्ट्राइक रेट से तिलक वर्मा ने की।
आख़िरी ओवर में हार्दिक ने स्कोर को ऐसे पहाड़ तक पहुँचा दिया कि सामने वाली टीम देख के ही घबरा जाए।
पर नहीं, इंग्लैंड घबराने वालों में से नहीं। कम से कम टी20 में तो नहीं।
पहले ओवर में अर्शदीप पर 13 रन पड़ने के बाद हार्दिक ने अगले ही ओवर में मात्र 2 रन देकर विकेट निकाल लिया। फिर भी इंग्लैंड नहीं रुकी।
बुमराह भी अपने पहले ओवर में विकेट ले गया और रन भी सिर्फ 7 दिए, वरुण ने भी पहले ही ओवर में विकेट चटका दिया, फिर भी इंग्लैंड के पॉवरप्ले में 68 रन्स आए।
इसके बाद तो जैसे गेंदबाजों के भूसा भरा गया हो, ऐसी मार मारी ब्रेथल ने कि 250+ स्कोर भी ख़तरे में लगने लगा।
लेकिन रन पिटते हुए भी अक्षर का वो विकेट या वो ज़बरदस्त कैच, फिर बुमराह का वो आठ रन का कंजूस ओवर या फिर अर्शदीप का लगातार तीन वाइड देने के बाद वो विकेट, हालाँकि उस विकेट का क्रेडिट भी अक्षर को ज़्यादा जाता है।
अंत में फिर बुमराह की अद्भुत गेंदबाजी, हार्दिक का पहली बॉल पर सिक्स खाने के बाद भी विकेट चटकाना और अंत में वो ज़बरदस्त थ्रो और रन आउट… क्या ग़जब टीम एफर्ट है यार… मज़ा आ गया।
मेरी नज़र में तो इंग्लैंड की भी तारीफ़ है कि ब्रेथल एंड कम्पनी ने हैरी ब्रूक के सस्ते में आउट होने के बावजूद कँधे नहीं झुकाए, अंत तक फाइट न छोड़ी। 253 रन का भयंकर टारगेट होने के बावजूद मात्र 7 रन से मिली जीत इंग्लैंड की ताकत भी दर्शाती है।
पर भारतीय टीम को सोचना चाहिए कि ऐसे टीम एफर्ट मैच में भी कौन से खिलाड़ी हैं जिनका योगदान नगण्य है। जिनके होने से टीम को सपोर्ट नहीं बल्कि बोझ महसूस हो रहा है? कौन कौन से खिलाड़ी हैं वो जिनको बौलिंग आती नहीं, फ़ील्डिंग वो कर नहीं पा रहे और बैटिंग उनसे हो नहीं रही? क्यों हैं फिर वो टीम में?
आप जानते हैं उन खिलाड़ियों को? जिनका होना इतनी मजबूत टीम को अपंग करने पर तुला है?
बहरहाल, बाक़ी 9 खिलाड़ियों के बेजोड़ एफर्ट से फाइनल पहुँचने की बधाई। न्यूज़ीलैंड और अहमदाबाद, दोनों अपने दुश्मन हैं, इन दोनों के अलावा दो अपने ही खिलाड़ी फिर से टीम के दुश्मन न बनें, फाइनल में ही सही, अब तो परफॉर्म करें।
(सिद्धार्थ अरोड़ा सहर)



