Monday, March 9, 2026
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Poetry by Manmeet Soni: नरेन्द्र मोदी के बारे में

Poetry by Manmeet Soni:  एक अलग ही किस्म की शैली है युवा कवि मनमीत की जिसमें नंगा सच सामने ला कर खड़ा कर देते हैं पूरी साफगोई से उनकी कविता के शब्द..

Poetry by Manmeet Soni:  एक अलग ही किस्म की शैली है युवा कवि मनमीत की जिसमें नंगा सच सामने ला कर खड़ा कर देते हैं पूरी साफगोई से उनकी कविता के शब्द.. 

 

नरेन्द्र मोदी के बारे में

वे मनुष्य हैं या नहीं हैं
कहा नहीं जा सकता..
जो मोदी को भगवान मानते हैं !
लेकिन उनके मनुष्य होने की संभावना बहुत कम है..
जो मोदी को हैवान मानते हैं !
___
दोस्तों !
कभी-कभी हमें ख़ुद को जांचना चाहिए
कि हम हमारी कुंठाओं का कचरा
कहीं उस पर तो नहीं फेंक रहे..
जो कचरा उठाकर
वापस आपकी ओर नहीं फेंक सकता !
घृणा
जब हमें अंधा कर दे..
हम मोदी के दाँतों में तम्बाकू
हम मोदी के बालों में गंजापन
हम मोदी के गालों में मशरूम
हम मोदी के चश्मे में ब्रांड
हम मोदी के कपड़ों में अय्याशी देखने लगें..
तो हमें रुक कर सोचना चाहिए
कि कहीं हम अंदर से ग़रीब तो नहीं हो गए !

यह ताली बजाने की बात नहीं है
कि राजेश जोशी नाम का कवि
अपनी कविता में यह कहता है..
कि मोदी के नेतृत्व में गुजरात के सूबे में अनगिनत बलात्कार हुए !
इसे कविता की आज़ादी नहीं..
इसे कविता का भौंडापन कहेंगे
कि विष्णु नागर नाम का कवि
मोदी की माँ पर एक घटिया कविता लिखता है और दाँत निपोरता है !
इसे कविता का दुर्भाग्य काल कहेंगे..
कि रज़ा से लेकर हिन्दवी तक के आयोजनों में
एक लक्ष्य बनाकर
मोदी पर पढ़ी जाती हैं घटिया कविताएं !
और यह कहा जाता है
कि भारत में चल रहे लोकतंत्र की तुलना में
सच्चा लोकतंत्र
ऐसे नक़ली कविता आयोजनों में पाया जाता है !

चिंता की बात है श्रीमान
कि आपको ट्रम्प जैसा कार्टून
मोदी से अधिक विश्वसनीय लगता है !
दुःख की बात है श्रीमान
कि शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन
आपको मोदी से अधिक लोकतांत्रिक लगते हैं !
मूर्खता की बात है श्रीमान
कि आप
सीरिया, ज़िम्बाब्वे, लेबनान, इराक को
भारत की तुलना में अधिक प्रगतिशील जानते हैं !
चूतियापे की बात है श्रीमान
कि हर पांच साल बाद
वोटर तय करते हैं जहाँ सरकार का भविष्य..
आप उस भारत की तुलना करते हैं
पाकिस्तान जैसे एक हिजड़े क़बीले से !
____
दरअसल बात यह है श्रीमान
कि आपको मोदी से नहीं..
अपने आप से नफ़रत है !
आपको नफ़रत है इस तथ्य से..
कि दो हज़ार चौदह के बाद
यह देश हिन्दुओं और मुस्लिमों के ख़ून से रंग जाना चाहिए था..
लेकिन ऐसा नहीं हुआ !
आपको आपातकाल चाहिए था श्रीमान..
लेकिन तीन बार सार्वजनिक चुनाव हो गए
और अब तक ऐसा कहीं कुछ भी नहीं हुआ !
आपको नई बाबरी चाहिए थी..
आपको नई शाहबानो चाहिए थी..
आपको नया हिंदू कोड बिल चाहिए था..
आपको लाचार सुप्रीम कोर्ट चाहिए था..
आपको शहर-शहर में सेक्स टॉय की दुकानें चाहिए थीं..
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ श्रीमान !
___
आप चींटियों की तरह मसल देना चाहते हैं
उन ग़रीब महिलाओं को..
जो आरती उतारती हैं Narendra Modi की !
आप कविता से बहिष्कार कर देना चाहते हैं मेरा
कि मेरी हिम्मत कैसे हुई
नरेन्द्र मोदी के पक्ष में कविता लिखने की !
आप जलेस प्रलेस के माध्यम से
टूट पड़ना चाहते हैं
अखिल भारतीय साहित्य परिषद पर..
कि हमारे होते हुए
कोई कैसे सेट कर सकता है
हरे के जवाब में भगवा नैरेटिव ?

मोदी की बोली ख़राब
मोदी की चाल ख़राब
मोदी के हाव-भाव ख़राब
मोदी की बात चीत ख़राब
मोदी की पत्नी छोड़ी हुई
मोदी की माँ उपेक्षित
मोदी के भाई ग़रीब नहीं, बहुत अमीर
क्या आप थक नहीं गए श्रीमान
इस तरह की बकवास करते हुए ?
___
हर शाम
आप इंतज़ार करते हैं रवीश कुमार का..
आप उम्मीद करते हैं
पुण्य प्रसून वाजपेई सरकार गिरा देगा..
आप टकटकी लगाए देखते हैं
ध्रुव राठी के वीडियोज़
कि बस एक बार
एक बार हमें कोई मौका मिले..
और हम हाइजैक कर लें लोकतंत्र को !
___
मैं जानता हूँ
यह कविता नहीं है
यह कविता के नाम पर गद्य है !
लेकिन कुमार अम्बुज कवि है
लेकिन देवी प्रसाद मिश्र कवि है
लेकिन विष्णु खरे या मंगलेश डबराल या वीरेन डंगवाल कवि था..
तो मैं
यानि मनमीत सोनी भी कवि हूँ !
इन दिनों
अगर कविता
एक तरह की उल्टी ही है..
तो मेरी उल्टी कविता क्यों नहीं है श्रीमान ?
___
एक मजबूर नीली पगड़ी वाले के बाद
एक आत्ममुग्ध, मगर आत्मविश्वासी मोदी को
बड़े प्यार और गर्व के साथ
धारण करता हूँ
अपने कंधे पर सोने के तमगे की तरह !
ठुकराता हूँ
समकालीन हिंदी कविता का वह वैभव..
जो खोखले कविता-संसार में
बीस-बीस हज़ार में खरीदता है श्रोता !
लानत भेजता हूँ
उन कलावादियों पर..
जो वाम के साथ वाम
और दक्षिण के साथ दक्षिण हो जाते हैं !

हाँ, मोदी के दाँत तम्बाकू से पीले हैं
हाँ, मोदी गंजा हो चुका है
हाँ, मोदी के गाल मशरूम से चमकते हैं
हाँ, मोदी ब्रांडेड चश्मा पहनता है
हाँ, मोदी के कपड़े अय्याशी की याद दिलाते हैं
लेकिन नहीं है
नरेन्द्र मोदी का कोई खाता
स्विट्ज़रलैंड में !
और सिर्फ़ इस एक अकेली वजह से
मैं चुनता हूँ नरेन्द्र मोदी को
पक्षपात करता हूँ कविता में !

अगर नागार्जुन जैसा कवि
इंदिरा गाँधी को
खुले आम गाली निकाल सकता है..
तो मनमीत नाम का कवि
एक चुने हुए प्रधानमंत्री की
प्रशस्ति क्यों नहीं गा सकता श्रीमान ?
कविता की भाषा में जवाब दीजिये श्रीमान !
(मनमीत सोनी)
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