Yakuza Gang: जापान के याकूजा गैंग में पहली गलती पर अंगूठा, दूसरी पर जाती है गर्दन – दुनिया का सबसे खतरनाक अंडरवर्ल्ड साम्राज्य..
दुनिया में जब भी अंडरवर्ल्ड, माफिया या गैंगस्टर की बात होती है तो अक्सर भारत के दाऊद इब्राहिम का डी गैंग या पाकिस्तान के रहमान डकैत का नाम सामने आता है। बॉलीवुड की फिल्मों ने भी इन नामों को खतरनाक डॉन के रूप में पेश किया है। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत और पाकिस्तान के ये गैंग दुनिया के सबसे खतरनाक गैंग्स के सामने कहीं नहीं टिकते। जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों में ऐसे संगठित अपराधी गिरोह हैं जिनकी ताकत और खौफ का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। इनमें सबसे डरावना नाम है जापान का याकूजा गैंग।
याकूजा गैंग: खौफ का दूसरा नाम
याकूजा गैंग का नियम बेहद सख्त है। अगर कोई सदस्य पहली बार गलती करता है तो उसे अपना अंगूठा खुद काटकर गिरोह के सामने रखना पड़ता है। यह उसकी गलती का सबूत होता है। लेकिन अगर वही सदस्य दूसरी बार गलती करता है या बगावत करता है तो उसकी सज़ा मौत होती है। गैंग का सरगना उसके हाथ में चाकू थमा देता है और उसे खुद अपना गला काटना पड़ता है। याकूजा का उसूल है कि वे हत्या जैसे अपराध में अपने हाथ गंदे नहीं करते, बल्कि गुनाहगार को खुद अपनी जान लेने पर मजबूर कर देते हैं।
संगठित अपराध का सबसे बड़ा नाम
याकूजा गैंग को दुनिया का सबसे संगठित अपराधी गिरोह माना जाता है। इनके काम करने का तरीका इतना व्यवस्थित है कि पुलिस और सरकार भी इनके खिलाफ सबूत जुटाने में नाकाम रहती है। ये लोग सीधे हत्या नहीं करते, बल्कि सामने वाले को ऐसी स्थिति में डाल देते हैं कि वह खुद अपनी जान गंवा दे। यही वजह है कि इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना बेहद कठिन होता है।
हफ्ता वसूली का अनोखा तरीका
मुंबई के वरिष्ठ क्राइम रिपोर्टर विवेक अग्रवाल बताते हैं कि दाऊद इब्राहिम का डी गैंग याकूजा के सामने कुछ भी नहीं है। मुंबई की भाषा में कहा जाए तो डी कंपनी “पानी कम चाय” जैसी है। याकूजा गैंग का हफ्ता वसूली का तरीका भी अलग है।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी बिल्डर को धमकाना हो तो वे कहते हैं कि पूरी बिल्डिंग को बम से उड़ा देंगे। डर के मारे बिल्डिंग मालिक खुद पूछता है कि आपको क्या चाहिए। तब याकूजा कहता है कि हमें हफ्ता सीधे पैसे में नहीं चाहिए, बल्कि बिल्डिंग का मेंटेनेंस ठेका हमें दे दो। अब ठेका लेने के बाद वे सामान्य दर से ज्यादा रकम वसूलते हैं। अगर ठेका एक रुपये का है तो वे डेढ़ रुपये लेते हैं। यही अतिरिक्त 50 पैसे उनका हफ्ता बन जाता है।
याकूजा की किले जैसी इमारतें
याकूजा गैंग की इमारतें भी बेहद रहस्यमयी होती हैं। ये बिल्डिंग पूरी तरह काले रंग की होती हैं, जिनमें खिड़की-दरवाजे नहीं होते। सिर्फ एक प्रवेश और निकास का रास्ता होता है। दीवारें इतनी मोटी होती हैं कि छोटे-मोटे मिसाइल भी बेअसर हो जाते हैं। बाहर से देखने पर लगता है कि बिल्डिंग में एक ही दरवाजा है, लेकिन असल में अंदर 50 से ज्यादा अंडरग्राउंड रास्ते होते हैं जिन्हें वे “रैटहोल्स” कहते हैं।
चीन और अमेरिका के माफिया
याकूजा की तुलना अगर करनी हो तो चीन के ग्रीन बैम्बू गैंग और रेड ड्रैगन गैंग का नाम लिया जा सकता है। ये गैंग शिपिंग और कंटेनर कंपनियों के जरिए काम करते हैं और समुद्री लुटेरों को फंडिंग करते हैं। उन्हें हथियार, तेज़ बोट और छुपने के ठिकाने मुहैया कराते हैं।
अमेरिका में भी सिसिलियन माफिया का इतिहास रहा है। इटली से आए क्रांतिकारी जब भ्रष्टाचार में डूबे तो उन्होंने अमेरिका में माफिया गैंग बनाया। वहीं से “माफिया” शब्द पूरी दुनिया में फैला।
भारतीय अंडरवर्ल्ड की स्थिति
भारत और पाकिस्तान के अंडरवर्ल्ड गैंग अभी भी उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं। यहां के माफिया मुख्य रूप से ड्रग्स, नकली सामान और मानव तस्करी जैसे धंधों में शामिल हैं। जबकि रूस के माफिया हथियारों की तस्करी और ब्लड डायमंड जैसे कारोबार में सक्रिय हैं।
नेपाल में डी गैंग का जंबो
वरिष्ठ पत्रकार विवेक अग्रवाल बताते हैं कि एक समय दाऊद के डी गैंग का सीईओ नेपाल में था, जिसे लोग जंबो कहते थे। उसका असली नाम था जैमीन शाह। उसने नेपाल में डी कंपनी के लिए पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया था— न्यूज चैनल, रेडियो स्टेशन, होटल चेन, मोटर व्हीकल शोरूम तक। लेकिन एक दिन भारतीय एजेंसियों ने मुंबई स्टाइल ऑपरेशन में उसे मार गिराया। उसकी SUV को रोककर बाइक सवारों ने फायरिंग की और वहीं उसका अंत हो गया।
याकूजा गैंग की कहानी बताती है कि दुनिया का सबसे खतरनाक अंडरवर्ल्ड भारत या पाकिस्तान में नहीं, बल्कि जापान जैसे विकसित देश में मौजूद है। अंगूठा काटने से लेकर खुद का गला रेतने तक की सज़ा इस गैंग को और भी डरावना बना देती है। इनके सामने दाऊद इब्राहिम और रहमान डकैत जैसे नाम बेहद छोटे लगते हैं।



