Saturday, May 9, 2026
Google search engine
Homeअजब ग़ज़ब‘Sex के बदले नौकरी’ पर सख्त होगा घाना- राष्ट्रपति जॉन महामा बोले-...

‘Sex के बदले नौकरी’ पर सख्त होगा घाना- राष्ट्रपति जॉन महामा बोले- अब इसे अपराध घोषित करना जरूरी

‘Sex फॉर जॉब्स’ प्रथा घाना में अब बंद हो सकती है -राष्ट्रपति जॉन महामा ने कड़ा रुख अपना कर नौकरी के बदले यौन संबंध मांगने को अपराध घोषित करने की मांग की है.. जानिए पूरा मामला..

‘Sex के बदले नौकरी’ पर सख्त होगा घाना! राष्ट्रपति जॉन महामा बोले- अब इसे अपराध घोषित करना जरूरी

अफ्रीकी देश घाना में महिलाओं के साथ होने वाले शोषण को लेकर एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। यहां लंबे समय से चल रही ‘सेक्स फॉर जॉब्स’ यानी नौकरी के बदले यौन संबंध की मांग करने वाली प्रथा पर अब सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है। घाना के राष्ट्रपति जॉन महामा ने साफ कहा है कि इस तरह की हरकत को अपराध घोषित किया जाना चाहिए और इसके खिलाफ कड़ा कानून बनाया जाना जरूरी है।

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर युवा महिलाओं को नौकरी पाने के दौरान कई तरह के दबाव और शोषण का सामना करना पड़ रहा है। अब सरकार इस गंभीर समस्या पर खुलकर बात करती नजर आ रही है।

यह मुद्दा 1 मई को कोफोरिडुआ में आयोजित एक टाउन हॉल कार्यक्रम के दौरान सामने आया। कार्यक्रम में एक छात्रा ने भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और शोषण पर सवाल पूछा। इसके जवाब में राष्ट्रपति महामा ने कहा कि मौजूदा कानून इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि नौकरी देने के बदले यौन संबंध मांगना पूरी तरह अस्वीकार्य है। राष्ट्रपति के मुताबिक यह केवल नैतिक रूप से गलत नहीं, बल्कि सत्ता और पद का दुरुपयोग भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी प्रथा को रोकने के लिए अलग और स्पष्ट कानून बनाया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति महामा ने कहा कि कई बार नौकरी देने वाले अधिकारी या नियोक्ता अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करते हैं। नौकरी की जरूरत में फंसी महिलाओं से निजी संबंध बनाने का दबाव डाला जाता है। उन्होंने इसे समाज के लिए बेहद खतरनाक और शर्मनाक बताया।

घाना में पहले से ही यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानून मौजूद हैं। लेबर एक्ट और आपराधिक कानून के तहत महिलाओं को कुछ कानूनी सुरक्षा दी गई है। घरेलू हिंसा कानून में भी कई प्रावधान शामिल हैं। लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये कानून ज्यादातर कार्यस्थल पर होने वाले सामान्य उत्पीड़न या घरेलू हिंसा तक सीमित हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नौकरी देने के बदले यौन संबंध की मांग करने जैसी स्थितियों के लिए कोई स्पष्ट और अलग कानूनी व्यवस्था नहीं है। यही कारण है कि इस तरह के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती।

घाना में यह समस्या लगातार इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि वहां युवाओं में बेरोजगारी बहुत ज्यादा है। सरकारी और निजी नौकरियों के लिए भारी प्रतिस्पर्धा रहती है। कई बार भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होती और चयन पूरी तरह अधिकारियों की मर्जी पर निर्भर होता है।

सामाजिक संगठनों का कहना है कि इसी माहौल का फायदा उठाकर कुछ लोग नौकरी चाहने वाली महिलाओं का शोषण करते हैं। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और नई नौकरी तलाश रही युवतियां सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं।

पूर्व राष्ट्रपति जॉन कुफोर की कानूनी सलाहकार रह चुकीं वकील विक्टोरिया ब्राइट ने राष्ट्रपति महामा के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि नौकरी के बदले सेक्स की मांग करना शोषण और भ्रष्टाचार दोनों है। इसे किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि घाना में सामाजिक और सांस्कृतिक दबाव भी बड़ी समस्या है। कई पीड़ित महिलाएं बदनामी और डर की वजह से शिकायत दर्ज नहीं करातीं। उन्हें डर रहता है कि समाज उन्हें ही गलत ठहराएगा या फिर नौकरी और भविष्य दोनों खतरे में पड़ जाएंगे।

इसके अलावा पुलिस तक पहुंचना और कानूनी कार्रवाई शुरू करना भी आसान नहीं माना जाता। यही वजह है कि ऐसे मामलों पर चर्चा तो खूब होती है, लेकिन अदालत तक बहुत कम मामले पहुंचते हैं। इससे दोषियों के मन में कानून का डर नहीं बन पाता।

घाना के कुछ सांसदों और सामाजिक नेताओं का मानना है कि समाज में मौजूद पितृसत्तात्मक सोच ने भी इस समस्या को बढ़ावा दिया है। कई जगहों पर महिलाओं को अब भी कमजोर और निर्भर माना जाता है, जिसका फायदा कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए उठाते हैं।

अगर सरकार अलग कानून लाती है, तो इससे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। एक्टिविस्टों का कहना है कि इससे पहली बार ‘सेक्स फॉर जॉब्स’ को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। साथ ही दोषियों के लिए तय सजा भी निर्धारित की जा सकेगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि नया कानून केवल कानूनी बदलाव नहीं होगा, बल्कि यह समाज को भी एक मजबूत संदेश देगा कि महिलाओं के शोषण को अब सामान्य बात मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि कानून बनाना ही काफी नहीं होगा। सबसे बड़ी चुनौती इसे सही तरीके से लागू करने की होगी। ऐसे मामलों में सबूत जुटाना अक्सर मुश्किल होता है क्योंकि ज्यादातर घटनाएं निजी बातचीत या बंद कमरों में होती हैं।

फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक और डिजिटल सबूतों की मदद से जांच पहले की तुलना में आसान हुई है। मोबाइल रिकॉर्डिंग, मैसेज और इलेक्ट्रॉनिक डाटा कई मामलों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

घाना के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अब इस मुद्दे पर तेज बहस शुरू हो गई है। राष्ट्रपति के बयान के बाद लोगों को उम्मीद है कि सरकार जल्द कोई बड़ा कदम उठा सकती है। यदि नया कानून लागू होता है, तो यह महिलाओं की सुरक्षा और समान अवसर की दिशा में घाना का एक ऐतिहासिक फैसला माना जाएगा।

(त्रिपाठी पारिजात)

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments