Anna Malai ने बीजेपी को अलविदा कहा, लॉन्च की नई पार्टी ‘वी द लीडर्स’ – तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर..
पूर्व आईपीएस अधिकारी और तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने बीजेपी से इस्तीफा देकर नई पार्टी ‘वी द लीडर्स’ का ऐलान किया। जानिए क्यों अलग हुए अन्नामलाई, क्या है एआईएडीएमके गठबंधन विवाद और तमिलनाडु चुनाव पर क्या होगा असर
तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। के. अन्नामलाई – जो कभी तमिलनाडु में बीजेपी के सबसे चमकदार चेहरे थे, जिन्हें पार्टी का भविष्य माना जाता था – उन्होंने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर बीजेपी से नाता तोड़ लिया। बस इतना ही नहीं। उन्होंने सीधे एक नई पार्टी का ऐलान भी कर दिया – नाम है ‘वी द लीडर्स’। और साफ कह दिया कि यह पार्टी तमिलनाडु का अगला विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी।
यह खबर किसी को ज्यादा हैरान नहीं करती – जो लोग तमिलनाडु की राजनीति पर नजर रखते हैं, उन्हें पता था कि कुछ न कुछ होने वाला है। लेकिन इतनी जल्दी और इस तरह से? यह जरूर चौंकाने वाला रहा।
बीजेपी ने इस्तीफा मंजूर किया, अन्नामलाई ने नई राह चुनी
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने शुक्रवार को अन्नामलाई का पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया। इसके कुछ ही घंटों बाद अन्नामलाई ने एक वीडियो संदेश जारी किया – सीधा, साफ और बिना किसी लाग-लपेट के।
उन्होंने कहा कि यह फैसला उस मिशन को आगे बढ़ाने की इच्छा से जन्मा है, जिसके लिए वो पहले दिन से राजनीति में आए थे। तमिलनाडु को बदलना। लोगों की जिंदगी बेहतर करना। यही सोचकर वो बीजेपी में शामिल हुए थे। लेकिन अब उन्हें लगता है कि यह काम एक अलग रास्ते से बेहतर तरीके से हो सकता है।
अठारह महीने से चल रही थी खींचतान
अन्नामलाई ने वीडियो में खुलकर बताया कि बीजेपी के साथ उनके मतभेद कोई एक दिन में नहीं पैदा हुए। पिछले अठारह महीनों से कई मुद्दों पर उनकी और पार्टी की सोच अलग-अलग रही है। धीरे-धीरे दूरी बढ़ती गई। बात करते रहे, सुलझाने की कोशिश होती रही – लेकिन आखिरकार रास्ते जुदा हो ही गए।
दिसंबर दो हजार पच्चीस में अन्नामलाई ने बीजेपी नेतृत्व को साफ बता दिया था कि वो पार्टी छोड़ना चाहते हैं। तब वरिष्ठ नेताओं ने उनसे अनुरोध किया था – तमिलनाडु चुनाव तक रुको, उसके बाद जो करना है करो। अन्नामलाई रुके। चुनाव से पहले तक पार्टी में रहे। और अब जब उन्हें लगा कि वक्त आ गया है – तो वो निकल गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उन्होंने गहरा सम्मान जताया। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सम्मान और सहमति – ये दोनों अलग-अलग चीजें हैं।
असली झगड़ा था एआईएडीएमके गठबंधन पर
तो आखिर वो मुद्दा क्या था जिसने सबसे ज्यादा खटकन पैदा की? अन्नामलाई ने साफ किया – एआईएडीएमके के साथ बीजेपी का चुनाव-पूर्व गठबंधन।
अन्नामलाई की राय शुरू से एकदम अलग रही है। उनका मानना था – और वो इसे बार-बार कह चुके हैं – कि तमिलनाडु में बीजेपी को अकेले चुनाव लड़ना चाहिए। खुद की ताकत बनानी चाहिए। किसी पुरानी पार्टी की बैसाखी पकड़कर नहीं, बल्कि अपने दम पर जमीन तैयार करनी चाहिए।
लेकिन पार्टी ने एआईएडीएमके के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया। अन्नामलाई इससे सहमत नहीं थे। यही वो दरार थी जो धीरे-धीरे इतनी बड़ी हो गई कि पाटी नहीं जा सकी।
‘वी द लीडर्स’ — क्या है यह नई पार्टी?
नाम सुनकर ही अंदाजा लग जाता है कि अन्नामलाई क्या संदेश देना चाहते हैं। हम लोग नेता हैं। आम आदमी की राजनीति। जन-केंद्रित सोच। बड़े परिवारों और वंशवाद से दूर।
अन्नामलाई ने कहा कि वो ऐसी राजनीति करना चाहते हैं जो सिर्फ अमीरों और ताकतवरों की नहीं, बल्कि हर आम तमिल नागरिक की बात करे। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रीय पार्टियां अक्सर तमिलनाडु की भावनाओं को ठीक से नहीं समझ पातीं। वहां की संस्कृति, वहां की पहचान, वहां के लोगों की असली जरूरतें – ये सब दिल्ली से नहीं दिखतीं।
इसीलिए वो एक ऐसी पार्टी बनाना चाहते हैं जो पूरी तरह से तमिलनाडु की अपनी हो।
डीएमके और मुख्यमंत्री विजय पर तीखा हमला
अन्नामलाई ने अपने वीडियो संदेश में सत्तारूढ़ डीएमके और मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि राजनीति किसी एक परिवार की जागीर नहीं है। यह इशारा साफ था – डीएमके की पारिवारिक राजनीति पर सीधा निशाना।
उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु को एक ऐसे विकल्प की जरूरत है जो न डीएमके हो, न एआईएडीएमके की पुरानी लकीर। कुछ नया। कुछ अलग। कुछ ऐसा जो सच में लोगों की बात करे।
रजनीकांत ने भी बुलाया था – लेकिन अन्नामलाई ने खुद का रास्ता चुना
यहां एक दिलचस्प बात सामने आई। अन्नामलाई ने दावा किया कि सुपरस्टार रजनीकांत समेत कई बड़ी और प्रभावशाली हस्तियों ने उनसे संपर्क किया था। उन्हें न्यौता दिया था – साथ मिलकर राजनीति करने का।
लेकिन अन्नामलाई ने मना कर दिया। उनका कहना था कि वो किसी के साथ मिलकर नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर, अपनी पहचान के साथ राजनीतिक मैदान में उतरना चाहते हैं। यह बात उनके स्वभाव के बिल्कुल अनुरूप है – जो सोचते हैं, वो करते हैं। किसी की परवाह किए बिना।
कौन हैं के. अन्नामलाई?
जो लोग अन्नामलाई को नहीं जानते, उनके लिए थोड़ा पीछे जाते हैं।
अन्नामलाई कर्नाटक संवर्ग के पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। पुलिस की नौकरी में थे – अच्छी-खासी, सरकारी, सुरक्षित नौकरी। लेकिन दो हजार उन्नीस में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। क्यों? क्योंकि वो राजनीति में आना चाहते थे। सीधे मैदान में उतरना चाहते थे।
दो हजार बीस में वो बीजेपी में शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर। और फिर जो हुआ वो काफी तेज था – महज एक साल के भीतर उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का अध्यक्ष बना दिया गया। पार्टी के सबसे युवा राज्य अध्यक्षों में से एक। तमिलनाडु में बीजेपी की पहचान का नया चेहरा।
उनकी शैली अलग थी। सीधी बात, बिना घुमाव के। तमिल में बोलते थे, तमिल लोगों से सीधे जुड़ते थे। सामाजिक माध्यमों पर उनकी पकड़ मजबूत थी। युवाओं में खासी लोकप्रियता थी। धीरे-धीरे वो तमिलनाडु में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे बन गए।
लेकिन चमक और पार्टी लाइन – ये दोनों हमेशा साथ नहीं चलते।
अब आगे क्या होगा?
यह सवाल अभी किसी के पास पक्का जवाब नहीं है।
‘वी द लीडर्स’ नई पार्टी है। अभी कोई संगठन नहीं है, कोई बड़ा नेटवर्क नहीं है, कोई चुनावी इतिहास नहीं है। तमिलनाडु में अकेले चुनाव लड़ना – जहां डीएमके और एआईएडीएमके जैसी जड़ें जमाई पार्टियां हैं – यह आसान नहीं होगा। बिल्कुल भी नहीं।
लेकिन अन्नामलाई कोई साधारण नेता नहीं हैं। उनकी अपनी एक अलग चाहने वालों की फौज है। लोग उन्हें सुनते हैं। उन पर भरोसा करते हैं। और तमिलनाडु में अभी एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो न डीएमके से खुश है, न एआईएडीएमके से – और बीजेपी को पूरी तरह से स्वीकार भी नहीं कर पाया।
उस वर्ग तक पहुंचना – यही अन्नामलाई की असली चुनौती है। और यही उनका असली मौका भी। तमिलनाडु की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। ‘वी द लीडर्स’ इस मोड़ पर क्या करेगी – यह देखना दिलचस्प होगा।
(त्रिपाठी पारिजात)



