Friday, June 26, 2026
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Vaibhav Suryavanshi: सचिन और विराट के बाद प्रतिष्ठित वैश्विक पत्रिका विस्डन ने दिया वैभव को सम्मान

Vaibhav Suryavanshi: अब 'विजडन' ने बिहार के लाल को सम्मानित किया -क्रिकेट में नया इतिहास रचने वाले वैभव को रखा फ्रन्ट पेज पर..

Vaibhav Suryavanshi: क्रिकेट के मक्का ‘विजडन’ पर छाया बिहार का 15 साल का लड़का: सचिन-विराट के बाद वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास 

बिहार के समस्तीपुर से निकले 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने ‘विजडन क्रिकेट मंथली’ के कवर पेज पर जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। जानिए कैसे एक किसान के बेटे ने ज़मीन बिकने के दर्द को भुलाकर आईपीएल में तहलका मचाया और ऑरेंज कैप जीती।

क्रिकेट की दुनिया में रोज़ नए रिकॉर्ड बनते हैं और टूटते हैं। लोग आते हैं, रन बनाते हैं और चले जाते हैं। लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो रिकॉर्ड बुक के पन्ने बदलने नहीं, बल्कि पूरे खेल का अंदाज़ बदलने आते हैं। अब ज़रा सोचिए, अगर कोई आपसे कहे कि एक 15 साल का बच्चा, जिसने अभी ठीक से दाढ़ी-मूछ भी नहीं देखी है, उसने पूरी दुनिया के क्रिकेट पंडितों को अपना दीवाना बना दिया है, तो क्या आप यक़ीन करेंगे? शायद नहीं। लेकिन बिहार के एक छोटे से ज़िले समस्तीपुर से निकले वैभव सूर्यवंशी ने इस बात को सौ फ़ीसदी सच साबित कर दिखाया है।

इस लड़के ने खेल की दुनिया में एक ऐसा धमाका किया है जिसकी गूँज सात समंदर पार इंग्लैंड तक सुनाई दे रही है। क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक पत्रिका मानी जाने वाली ‘विजडन क्रिकेट मंथली’ ने अपने जून 2026 के ताज़ा अंक में इस युवा बल्लेबाज़ को अपने कवर पेज पर जगह दी है। क्रिकेट में विजडन के कवर पर आने का मतलब जानते हैं आप? इसका सीधा सा मतलब यह है कि पूरी दुनिया के क्रिकेट जगत ने मान लिया है कि एक नया महानायक पैदा हो चुका है।

सचिन और विराट के ख़ास क्लब में एंट्री

विजडन ने अपने इस अंक की हेडलाइन में वैभव सूर्यवंशी को एक ऐसा ‘जीनियस’ बताया है जो खेल की पुरानी और पारंपरिक सीमाओं को तोड़ रहा है। भारत के क्रिकेट इतिहास को उठाकर देखें तो वैभव से पहले सिर्फ़ दो ही ऐसे बड़े नाम रहे हैं जिन्हें इस ग्लोबल मैगज़ीन के कवर पर चमकने का मौक़ा मिला। पहले थे क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर, जो साल 2014 में यहाँ दिखे थे। उनके बाद साल 2017 में किंग विराट कोहली की तस्वीर इस पर छपी थी।

अब इन दो बड़े दिग्गजों के ठीक बाद सीधे इस 15 साल के बच्चे का नाम आना कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इतनी छोटी सी उम्र में विजडन के फ्रंट पेज पर छाने वाले वैभव दुनिया के पहले और सबसे युवा भारतीय क्रिकेटर बन गए हैं। इस मैगज़ीन ने साफ़ शब्दों में लिखा है कि इस लड़के के खेलने के तरीक़े ने क्रिकेट के मायने ही बदल दिए हैं।

निडर अंदाज़ और गेंदबाजों का ख़ौफ़

आख़िर इस 15 साल के बच्चे में ऐसा क्या ख़ास है कि विजडन जैसी बड़ी मैगज़ीन इसकी मुरीद हो गई? जवाब है- उसका बेख़ौफ़ अंदाज़। वैभव जब क्रीज़ पर बल्ला लेकर खड़े होते हैं, तो उन्हें इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि सामने कौन सा गेंदबाज़ दौड़ रहा है। राजस्थान रॉयल्स के कैंप में उनके मेंटर रहे ज़ुबिन भरूचा कहते हैं कि वैभव कभी गेंदबाज़ का नाम या उसका कद देखकर बैटिंग नहीं करते। उनके लिए गेंदबाज़ का रुतबा कोई मायने नहीं रखता, उनका पूरा ध्यान सिर्फ़ और सिर्फ़ सामने से आ रही गेंद पर होता है।

यही वजह है कि आईपीएल 2026 के सीज़न में जब जसप्रीत बुमराह, पैट कमिंस या मिचेल स्टार्क जैसे दुनिया के सबसे ख़तरनाक और डरावने गेंदबाज़ उनके सामने आए, तो वे सब बिल्कुल बेअसर दिखाई दिए। वैभव ने ट्रेडिशनल क्रिकेट की उस पुरानी परिभाषा को ही बदल दिया है जहाँ गुड-लेंथ की गेंदों पर संभलकर खेला जाता था। वे क्रीज़ पर बिना ज़्यादा आगे-पीछे हिले अपनी गज़ब की ताक़त से फ्रंट-फुट और बैक-फुट दोनों ही गेंदों को सीधे बाउंड्री के बाहर पहुँचा देते हैं। उन्होंने श्रीलंका ‘ए’ के ख़िलाफ़ सिर्फ़ 11 गेंदों में लिस्ट-ए क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज़ अर्धशतक ठोककर दुनिया को बता दिया था कि उनका बल्ला शांत बैठने के लिए नहीं, बल्कि इतिहास रचने के लिए बना है।

जब पिता ने बेटे के सपने के लिए बेच दी ज़मीन

वैभव को आज जो चमक और शोहरत मिल रही है, वह उन्हें रातों-रात या किसी लॉटरी में नहीं मिली है। इस बड़ी कामयाबी के पीछे एक छोटे से गाँव के किसान परिवार की आँखों के आँसू, कड़ा अनुशासन और बहुत बड़ा त्याग छिपा है। एक दौर ऐसा भी था जब वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी के पास अपने बेटे की क्रिकेट ट्रेनिंग जारी रखने के लिए पैसे ख़त्म हो गए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने लाडले के क्रिकेटर बनने के सपने को टूटने से बचाने के लिए उन्होंने अपनी जी-जान से सींची हुई खेती की ज़मीन तक बेच दी।

सिर्फ़ 9 साल की उम्र से ही वैभव का कड़ा इम्तिहान शुरू हो गया था। बेहतर पिच पर प्रैक्टिस करने और अच्छे कोच से ट्रेनिंग लेने के लिए वे हर दूसरे दिन समस्तीपुर से पटना तक का 100 किलोमीटर का थका देने वाला सफ़र तय करते थे। सुबह जल्दी उठना, लोकल ट्रेनों और बसों के धक्के खाना और फिर शाम को थककर घर लौटना- यही उनकी रोज़ की ज़िंदगी बन चुकी थी। लेकिन पिता के उस बड़े त्याग और बेटे की इस कठिन तपस्या का फल आख़िरकार दुनिया के सामने आ ही गया।

अंडर-19 वर्ल्ड कप से लेकर आईपीएल की ‘ऑरेंज कैप’ तक

इस तपस्या का सबसे पहला और बड़ा असर दिखा साल 2026 के अंडर-19 विश्व कप के फ़ाइनल मैच में। इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खिताबी मुक़ाबले में भारत की टीम दबाव में थी, लेकिन वैभव अलग ही मूड में मैदान पर उतरे थे। उन्होंने अंग्रेज़ गेंदबाज़ों की ऐसी धुनाई की कि देखने वाले दाँतों तले उंगलियाँ दबाने पर मजबूर हो गए। वैभव ने महज़ 80 गेंदों का सामना करते हुए 175 रनों की एक बेहद आक्रामक और तूफ़ानी पारी खेल डाली। उनकी इस पारी के दम पर भारत ने छठी बार अंडर-19 विश्व कप की ट्रॉफ़ी पर कब्ज़ा किया।

इस शानदार प्रदर्शन के तुरंत बाद शुरू हुआ आईपीएल 2026 का मेला। राजस्थान रॉयल्स की जर्सी पहनकर जब वैभव मैदान पर उतरे, तो उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में तहलका मचा दिया। उन्होंने बड़े-बड़े इंटरनेशनल गेंदबाज़ों के मन में ऐसा खौफ़ पैदा किया कि कप्तानों को समझ नहीं आ रहा था कि उनके लिए फ़ील्डिंग कहाँ सजाई जाए। पूरे आईपीएल सीज़न में वैभव ने 237 से भी ज़्यादा के धमाकेदार और अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से बैटिंग करते हुए कुल 776 रन कूट डाले। नतीजा यह हुआ कि वे आईपीएल के इतिहास में ‘ऑरेंज कैप’ जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए। उनके इस विस्फोटक खेल ने उन्हें रातों-रात पूरी दुनिया का सबसे चर्चित और चहेता बल्लेबाज़ बना दिया।

भारतीय क्रिकेट का चमकता हुआ कल

विजडन के कवर पेज पर वैभव सूर्यवंशी की यह चमचमाती तस्वीर सिर्फ़ एक अदद खिलाड़ी की निजी सफ़लता की कहानी नहीं है। यह असल में बदलते हुए और नए दौर के भारतीय क्रिकेट की एक बेहद ख़ूबसूरत और ताज़ा तस्वीर है। भारत के लिए अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू करने की दहलीज़ पर खड़े वैभव ने दुनिया को यह साफ़-साफ़ समझा दिया है कि अगर आपके भीतर कूट-कूट कर प्रतिभा भरी हो और आपका आत्मविश्वास चट्टान की तरह मज़बूत हो, तो उम्र महज़ एक कागज़ी संख्या बनकर रह जाती है। आज पूरी दुनिया इस नए सूर्यवंशी के उदय को बड़े कौतूहल और सम्मान के साथ देख रही है। उनका असली सफ़र तो अभी बस शुरू ही हुआ है, लेकिन उनकी धमक ने अभी से पूरे क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया है।

(त्रिपाठी पारिजात)

 

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