Haseena Maan Jaayegi: गोविंदा-संजू बाबा की वो ब्लॉकबस्टर कॉमेडी जिसके पूरे हो गये हैं 27 साल मगर जायेका आज भी शानदार मजेदार है..
25 जून 1999 को रिलीज़ हुई डेविड धवन की सुपरहिट फ़िल्म ‘हसीना मान जाएगी’ के 27 साल पूरे हो गए हैं। जानिए गोविंदा द्वारा ‘बीवी नंबर वन’ ठुकराने, क्रिकेट वर्ल्ड कप के उस क्रेज़ और शशि कपूर-करिश्मा कपूर से जुड़े इस दिलचस्प इत्तेफ़ाक़ की पूरी कहानी।
फ्लैशबैक में चलिए और साल 1999 के उस दौर को याद कीजिए। जून का महीना था, पूरा देश टीवी स्क्रीन से चिपका हुआ था क्योंकि इंग्लैंड में क्रिकेट वर्ल्ड कप चल रहा था। भारत मैच खेल रहा था और हर ओवर के बाद जब एड ब्रेक आता था, तो टीवी पर एक प्रोमो छाया रहता था – दो भाई, एक अमीर बाप और उनका ज़बरदस्त पागलपन! हाँ, हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की ऑल-टाइम कल्ट कॉमेडी फ़िल्म ‘हसीना मान जाएगी’ की। 25 जून 1999 के दिन रिलीज़ हुई इस फ़िल्म ने कल ही अपने शानदार 27 साल पूरे कर लिए हैं। डेविड धवन के डायरेक्शन में बनी इस फ़िल्म का क्रेज़ ऐसा था कि वर्ल्ड कप के एड ब्रेक्स ने इसे रिलीज़ से पहले ही घर-घर में सुपरहिट बना दिया था।
इस फ़िल्म के पीछे की कहानियाँ और इसके दोनों मेन लीड एक्टर्स – गोविंदा और संजय दत्त – से जुड़े किस्से इतने दिलचस्प हैं कि आज भी सुनेंगे तो मज़ा आ जाएगा।
जब चीची ने सलमान के लिए छोड़ दी ‘बीवी नंबर वन’
इस फ़िल्म से जुड़ा सबसे बड़ा और दिलचस्प क़िस्सा सुपरस्टार गोविंदा यानी हमारे प्यारे चीची से जुड़ा है। उसी साल डेविड धवन एक और फ़िल्म बना रहे थे जिसका नाम था ‘बीवी नंबर वन’। उन्होंने वह फ़िल्म पहले गोविंदा को ऑफर की थी। लेकिन गोविंदा ने कथित तौर पर उस बड़ी फ़िल्म का ऑफर साफ़ ठुकरा दिया।
वजह जानते हैं क्या थी? गोविंदा का मानना था कि ‘बीवी नंबर वन’ में उन्हें जो रोल मिल रहा था, वैसा ही दो बीवियों के चक्कर में फँसा हुआ किरदार वो पहले ही ‘साजन चले ससुराल’ में निभा चुके थे। वे कुछ नया करना चाहते थे और ‘हसीना मान जाएगी’ में उनका मोनू का किरदार बिल्कुल अलग और नटखट था। आखिरकार वो रोल सलमान खान के पास गया। मज़ेदार बात देखिए, दोनों ही फ़िल्में डेविड धवन ने बनाईं और दोनों ही साल 1999 की सबसे बड़ी हिट्स में शुमार हुईं।
संजू बाबा और गोविंदा की ‘जोड़ी नंबर वन’
‘हसीना मान जाएगी’ संजय दत्त और गोविंदा की साथ में चौथी फ़िल्म थी। इन दोनों की ऑन-स्क्रीन ट्यूनिंग और रीयल-लाइफ़ दोस्ती कमाल की थी। इस फ़िल्म से पहले ये दोनों ‘दो क़ैदी’, ‘ताक़तवर’ और ‘आंदोलन’ जैसी एक्शन-ड्रामा फ़िल्मों में साथ दिख चुके थे। लेकिन ‘हसीना मान जाएगी’ ने इनके भीतर के कॉमिक टाइमिंग के उस्ताद को बाहर निकाला। सोनू (संजय दत्त) और मोनू (गोविंदा) की इस जोड़ी को पब्लिक ने इतना प्यार दिया कि आगे चलकर इस जोड़ी ने ‘जोड़ी नंबर वन’ और ‘एक और एक ग्यारह’ जैसी सुपरहिट फ़िल्मों से सिनेमाघरों में दोबारा खूब तालियाँ बटोरीं।
कपूर ख़ानदान का एक अनोखा और जादुई इत्तेफ़ाक़
अब बात करते हैं इस फ़िल्म के नाम से जुड़े एक बहुत ही ख़ूबसूरत इत्तेफ़ाक़ की, जो सीधे बॉलीवुड के सबसे बड़े कपूर ख़ानदान से जुड़ता है। साल 1999 से बहुत पहले, यानी 1968 में भी ‘हसीना मान जाएगी’ नाम से ही एक फ़िल्म आई थी, जिसे प्रकाश मेहरा ने डायरेक्ट किया था। उस पुरानी फ़िल्म के हीरो थे हैंडसम चार्मर शशि कपूर और हीरोइन थीं बबीता।
अब वक़्त का पहिया घूमिए और 1999 की ‘हसीना मान जाएगी’ पर आइए। इस नई फ़िल्म की लीड हीरोइन थीं करिश्मा कपूर, जो कि असल ज़िंदगी में बबीता की बेटी हैं! और ज़ाहिर है, शशि कपूर रिश्ते में करिश्मा कपूर के दादा लगते थे। है ना कितना कमाल का कनेक्शन? जिस टाइटल पर माँ-दादा ने कभी रोमांस किया था, सालों बाद उसी टाइटल वाली फ़िल्म में बेटी ने आकर बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया।
ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन उम्र का ये कैसा हेरफेर?
फ़िल्म में करिश्मा कपूर के अमीर और सख़्त पिता का रोल निभाया था अनुपम खेर ने (यानी गुलज़ारिलाल वर्मा)। कहानी में अनुपम खेर की एक बड़ी बहन भी थीं, जो भूतनाथ (कादर ख़ान) के प्यार में पागल थीं। वो रोल निभाया था वेटरन एक्ट्रेस अरुणा ईरानी ने। यानी ऑन-स्क्रीन अरुणा ईरानी, अनुपम खेर की बड़ी बुआ-जैसी बहन बनी थीं। लेकिन अगर आप रीयल लाइफ़ का सच जानेंगे तो चौंक जाएँगे – असल ज़िंदगी में अरुणा ईरानी अनुपम खेर से पूरे 9 साल बड़ी हैं! लेकिन डेविड धवन की फ़िल्मों में तो ये सारे लॉजिक वैसे भी साइड में रख दिए जाते थे, और स्क्रीन पर जो दिखता था वो सिर्फ़ शुद्ध मनोरंजन होता था।
चाचा जी (परेश रावल) का वो ‘ओह नो!’, सतीश कौशिक का ‘पप्पू पेजर’ वाला आइकॉनिक विलेन का किरदार और गोविंदा का वो नानी बनकर साड़ी में डांस करना – इस फ़िल्म का हर एक सीन आज भी मीम्स की दुनिया में राज करता है। क्या आपने भी टीवी पर संडे के दिन इस फ़िल्म को बार-बार देखा है? नहीं देखी तो अब देखना जब भी मौका मिले..
(अर्चना शैरी)



