Saturday, February 28, 2026
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Adobe: एक दिन में पराया हो गया 3,716 करोड़ का घर

Adobe:  ₹3,716 करोड़ का घर — एक दिन में पराया..और अचानक पता चला — घर का मालिक कौन होता है?..

Adobe:  ₹3,716 करोड़ का घर — एक दिन में पराया..और अचानक पता चला — घर का मालिक कौन होता है?..

कौन है पौने चार हजार करोड़ के घर का मालिक ? – बैंक ? सरकार ? या फिर — वो शख़्स जिसका नाम दरवाज़े पर लिखा है ?

25 फरवरी 2026, मुंबई, पाली हिल, बांद्रा ।
एक घर है, नाम है — ‘Abode’ (निवास)।
17 मंज़िल । 70,000 स्क्वायर फीट ।
समुंदर दिखता है खिड़की से, शहर दिखता है छत से ।

और कीमत?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आंकी — ₹3,716 करोड़।
बाज़ार कहता है — ₹5,000 करोड़ ।

लेकिन 25 फरवरी को सुबह यह घर किसी और का हो गया।
ईडी ने दस्तक दी, कागज दिखाया और कहा –
“यह अब सरकार की संपत्ति है।”

मालिक का नाम? अनिल अंबानी।
और अचानक भारत के सबसे अमीर परिवार का एक सदस्य
अपने ही घर में मेहमान बन गया ।

ज़रा रुको । पहले समझते हैं ₹3,716 करोड़ का मतलब क्या है ?अगर आप महीने के ₹1 लाख कमाते हो तो यह घर खरीदने में आपको 10,186 साल लगेंगे ।
अगर महीने के ₹10 लाख कमाते हो तो 1,018 साल ।

मतलब
मुगल साम्राज्य के समय से कमाना शुरू करते तब भी अभी तक यह घर नहीं ख़रीद पाते। यह सिर्फ एक घर है, एक बंगला
17 मंज़िल। लेकिन इसकी कीमत –
एक छोटे शहर के पूरे साल के बजट से ज़्यादा है।

और यह घर एक दिन में कागज के एक टुकड़े से किसी और का हो गया।
अब थोड़ा पीछे चलें ।2000 के दशक की शुरुआत ।
रिलायंस दो हिस्सों में बँट गई ।
एक हिस्सा — मुकेश अंबानी।
दूसरा — अनिल अंबानी।

अनिल को मिली — रिलायंस कम्यूनिकेशंस (आर कॉम)। रिलायंस पावर, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर।
तब 2008 में अनिल अंबानी दुनिया के 6वें सबसे अमीर इंसान थे। संपत्ति 42 बिलियन डॉलर (करीब ₹3.5 लाख करोड़)।

लेकिन फिर अनिल अंबानी ने समाजवादी पार्टी से जुड़कर पोलिटिकली एक्सपोज़ हो गये । बड़े भाई मुकेश ने समझाया, व्यापारियों को सभी राजनीतिक दलों से संबंध बनाकर चलना पड़ता है, किसी एक दल के साथ दिखाई देना व्यावसायिक हितों के विपरीत है । लेकिन अहं में चूर अनिल ने बड़े भाई की एक न सुनी । और नित नये भारी मात्रा में कर्ज लेते रहे ।
फलत:
जब टेलीकॉम में कम्पीटीशन बढ़ी ।
आर कॉम की किस्मत पलट गई ।

कर्ज़ बढ़ता गया, रेवेन्यू घटता गया । अन्य व्यवसाय में भी रेवेन्यू घटकर घाटा होने लगा ।
फिर 2019 में —आर कॉम को दिवालिया घोषित कर दिया ।
कुल कर्ज — ₹46,000 करोड़। बैंकों ने पैसे मांगे। लेकिन पैसे नहीं थे।
तो सीबीआई केस । ईडी ने जांच शुरू की।
आरोप, कि 2010-2012 में —बैंकों को गुमराह करके लोन लिया गया। और फिर वो पैसे सही जगह इस्तेमाल नहीं हुए।
और धीरे-धीरे —ईडी ने संपत्तियां जब्त करनी शुरू कीं।
पहले ऑफिस। फिर जमीनें। फिर शेयर्स ।

और अब
घर, ‘Abode’ । ₹3,716 करोड़ का घर।
कुल जब्त संपत्ति अब तक —₹15,700 करोड़ से ज़्यादा।
और 26 फरवरी को —अनिल अंबानी —दिल्ली में ईडी के दफ़्तर में —पूछताछ के लिए पेश हुए।

अब ज़रा सोचो। तुम एक घर में रहते हो । 70,000 स्क्वायर फीट। 17 मंज़िल। समुंदर का नज़ारा। शहर की रोशनी।
और एक दिन —सुबह उठे —और पता चला —
यह अब तुम्हारा नहीं रहा ।

तुम वहाँ हो, लेकिन मालिक नहीं हो।
तो क्या तुम्हारे पास है? कपड़े, यादें, शायद कुछ पैसे, बस ।

और यहीं —असली सवाल उठता है —”धनी” किसे कहते हैं?
क्या उसे —जिसके पास ₹3,716 करोड़ का घर है?
या उसे, जिसके पास वो चीज़ है —जो कोई छीन नहीं सकता?

महात्मा बुद्ध ने कहा था —जुड़ाव ही दुःख की जड़ है।
अनिल अंबानी ने ‘Abode’ बनाया। ₹3,716 करोड़ लगाए।
सालों तक रहे, लेकिन वो घर कभी उनका था ही नहीं ।
क्योंकि —जो चीज़ छीनी जा सकती है —वो कभी तुम्हारी नहीं होती।

मार्कस औरेलियस ने लिखा था —
“You have power over your mind — not outside events.”

मतलब तुम्हारा control सिर्फ अपने मन पर है —बाहरी चीज़ों पर नहीं।
तो घर, गाड़ी, पैसा यह सब बाहरी चीज़ें हैं।
आज हैं, कल नहीं हो सकतीं, लेकिन
तुम्हारा ज्ञान।
तुम्हारी स्किल्स।
तुम्हारे रिश्ते।
तुम्हारी शांति।
यह कोई नहीं छीन सकता।
और यही असली धन है ।

अब एक मज़ेदार बात । हम सब सोचते हैं —”काश मेरे पास ₹3,716 करोड़ का घर होता।”
लेकिन सोचो —जिसके पास है —उसकी क्या हालत है?
वो घर में है, लेकिन घर उसका नहीं ।
वो मालिक है —लेकिन कंट्रोल किसी और का है ।

सेनेसा ने कहा था —
“It is not the man who has too little, but the man who craves more, that is poor.”

मतलब —ग़रीब वो नहीं जिसके पास कम है, गरीब वो है, जो और चाहता है ।

यह पहली बार नहीं हुआ । होवार्ड हुग्स, अपने ज़माने के सबसे अमीर, एयरलायंस के मालिक, हॉलीवुड फिल्मों के प्रोड्युसर।
लेकिन आख़िरी सालों में, एक होटल के कमरे में —
अकेले —बीमार —मर गए ।
स्टीव जॉव्स, एपल के फाउंडर, अरबपति ।
लेकिन जब कैंसर हुआ तो सारा पैसा उन्हें नहीं बचा पाया।

तो अब सवाल – असली धन क्या है?
असली धन वो है —जो तुम्हारे भीतर है, तुम्हारा ज्ञान —
कोई नहीं छीन सकता। तुम्हारा चरित्र कोई नहीं छीन सकता।
तुम्हारी शांति —कोई नहीं छीन सकता।
और सबसे बड़ी बात —तुम्हारे रिश्ते ।
जो लोग तुम्हारे पास तब भी रहें —जब तुम्हारे पास कुछ नहीं।
वो असली धन है।

यह पोस्ट मैंने इसलिए नहीं लिखा कि अनिल अंबानी को जज करूं । मैं जज करने वाला कौन हूँ?
यह पोस्ट इसलिए लिखा —ताकि हम सब सोचें।

कि जब हम सपने देखते हैं —”काश मेरे पास बड़ा घर होता” तो हम यह भी सोचें “क्या वो घर मुझे वो देगा, जो मैं ढूंढ रहा हूँ?”
क्योंकि –
हम घर नहीं ढूंढ रहे।
हम शांति ढूंढ रहे हैं।
हम गाड़ी नहीं ढूंढ रहे।
हम सम्मान ढूंढ रहे हैं।
हम पैसा नहीं ढूंढ रहे।
हम सुरक्षा ढूंढ रहे हैं।

लेकिन सच यह है –
शांति घर में नहीं मिलती, शांति मन में मिलती है।
सम्मान गाड़ी से नहीं मिलता, सम्मान चरित्र से मिलता है।

जरा सोच कर देखिये – असली धन क्या है — आपके हिसाब से?

(सव्यसाची सुभाष)

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