Corporate Jihad: नासिक आईटी कंपनी केस: HR निदा खान और तौसिफ अत्तर पर यौन शोषण, धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप, SIT जांच में विदेशी फंडिंग के सुराग..
नासिक की एक प्रमुख आईटी कंपनी में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण और अब मानव तस्करी का मामला सामने आया है। इस केस ने पूरे महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देशभर में सनसनी फैला दी है। पुलिस की जांच में लगातार नए मोड़ सामने आ रहे हैं। अब यह मामला केवल यौन शोषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें विदेशी फंडिंग, वित्तीय लेन-देन और महिलाओं को मलेशिया भेजने की साजिश जैसे गंभीर पहलू भी जुड़ गए हैं।
कौन है निदा खान?
इस पूरे मामले की केंद्रबिंदु बनी हैं कंपनी की HR मैनेजर निदा खान। वह सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा हैं और कंपनी की इंटरनल POSH कमिटी (यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति) का हिस्सा थीं। आरोप है कि कई शिकायतें उनके पास पहुंचीं, लेकिन उन्होंने उन्हें नजरअंदाज कर दिया या आगे नहीं बढ़ाया। जांचकर्ताओं का कहना है कि POSH प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। पुलिस के अनुसार, निदा खान और तौसिफ अत्तर इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड हैं।
SIT का अंडरकवर ऑपरेशन
पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए SIT बनाई। सात महिला पुलिसकर्मी हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर कंपनी में काम करती रहीं और आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखती रहीं। इसी ऑपरेशन के आधार पर कई शिकायतें सामने आईं और नौ एफआईआर दर्ज हुईं। अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मलेशिया भेजने की साजिश
जांच में सामने आया कि आरोपी पीड़ित युवतियों को मलेशिया भेजने की योजना बना रहे थे। वीडियो कॉल पर इस बारे में चर्चा हुई थी। एक पीड़िता का पासपोर्ट भी बनवाया जा रहा था। पुलिस को शक है कि यह केवल यौन शोषण का मामला नहीं, बल्कि मानव तस्करी का बड़ा नेटवर्क हो सकता है। SIT को विदेशी फंडिंग और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के सुराग मिले हैं।
गंभीर आरोप
आरोपियों पर यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण, मानव तस्करी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित युवतियों ने बताया कि उन्हें नमाज पढ़ने, गोमांस खाने और धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया। कंपनी के अंदर ही कुछ कर्मचारियों ने इस जाल को फैलाया।
कंपनियों की प्रतिक्रिया
TCS ने आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। पुलिस अब बैंक लेन-देन, विदेशी संपर्क और संभावित रैकेट की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों को संदेह है कि इस पूरे मामले का राष्ट्रीय सुरक्षा से भी संबंध हो सकता है।
समाज पर असर
इस केस ने महिलाओं की सुरक्षा और कॉर्पोरेट जगत की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। HR विभाग, जो कर्मचारियों की सुरक्षा और शिकायतों का निवारण करने के लिए जिम्मेदार होता है, वही इस मामले में आरोपों के घेरे में है। इससे यह साफ होता है कि अगर आंतरिक सुरक्षा तंत्र कमजोर हो तो महिलाएं कितनी असुरक्षित हो सकती हैं।
(त्रिपाठी पारिजात)



