India Military Diplomacy: उज्बेकिस्तान में ‘डस्टलिक’ सैन्य अभ्यास से भारत ने ईरान संकट और आसिम मुनीर की चालों पर साधा कूटनीतिक वार..
पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। तेल सप्लाई बाधित होने से एशिया से लेकर यूरोप तक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। इस बीच भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर के ईरान दौरे से ठीक पहले भारत ने अपनी सैन्य और कूटनीतिक रणनीति की बिसात बिछा दी है।
भारत का रणनीतिक कदम
भारत ने उज्बेकिस्तान की सेना के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ (Dustlik) का सातवां संस्करण शुरू किया है। यह अभ्यास उज्बेकिस्तान के नामंगन क्षेत्र में 12 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक चलेगा। भारतीय सेना ने कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और विशेष टुकड़ियों के साथ इस अभ्यास में भाग लिया है। इसका उद्देश्य केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि आतंकवाद और अवैध सशस्त्र समूहों के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को विकसित करना है।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों की मजबूती
‘डस्टलिक’ अभ्यास भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक है। उद्घाटन समारोह में उज्बेकिस्तान के पूर्वी सैन्य जिले के कमांडर मेजर जनरल सईदोव ओयबेक अजादोविच मुख्य अतिथि रहे। दोनों देशों के अधिकारियों ने इस अभ्यास को क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति के लिए अहम बताया।
अभ्यास का फोकस
इस अभ्यास में संयुक्त विशेष अभियानों पर जोर दिया जा रहा है। इसमें सैनिकों को पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन करने, दुश्मन के ठिकानों पर हमले करने, कब्जे वाले क्षेत्रों को मुक्त कराने और एकीकृत संचालन प्रणाली विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारतीय सेना अपने अनुभव और तकनीक उज्बेकिस्तान के साथ साझा कर रही है, वहीं उज्बेकिस्तान की कार्यप्रणाली को भी समझ रही है।
दुश्मनों का सफाया और शांति का संदेश
भारत का यह कदम केवल सैन्य ताकत दिखाने के लिए नहीं है। इसका मकसद आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटना और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है। पाकिस्तान जहां खुद को शांतिदूत दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत ने व्यावहारिक कदम उठाकर यह संदेश दिया है कि उसकी प्राथमिकता शांति और सुरक्षा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त सैन्य अभ्यास से सैनिकों के बीच विश्वास और तालमेल बढ़ता है। यह न केवल भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि सेंट्रल एशिया में भारत की सामरिक स्थिति को भी बेहतर बनाएगा। अभ्यास का समापन 48 घंटे के वैलिडेशन एक्सरसाइज से होगा, जिसमें संयुक्त रणनीतियों की प्रभावशीलता का परीक्षण किया जाएगा।
भारत की मिलिट्री डिप्लोमेसी
भारत का उज्बेकिस्तान में सैन्य उपस्थिति दर्ज कराना इस बात का सबूत है कि नई दिल्ली अब सेंट्रल एशिया में अपनी मिलिट्री डिप्लोमेसी को मजबूत कर रही है। ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के बीच भारत का यह कदम दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा बल्कि आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी भारत की भूमिका को और अहम बना देगा।



