Asha Bhosle: बड़ी दीदी के बाद अब छोटी दीदी भी चली गई लेकिन हम सबके पास ढेरो प्यारे प्यारे गाने छोड़ गई – ताई तुम्हारी याद आयेगी..हमेशा आयेगी !!
क्योंकि लता दीदी जल्दी सो जाती हैं, इसलिए ओपी नय्यर साहब रात दो ढाई बजे, आशा जी को घर छोड़ने के बहाने इतनी ज़ोर से ब्रेक्स लगाते थे कि आसपड़ोस घबराकर उठ जाए।
ये वो समय था जब आशा जी और लता जी के बीच रिश्ते बहुत खट्टे हो चुके थे। लता जी को कैबरे आदि के जो गाने पसंद नहीं आते थे, वो गाने वह आगे आशा जी को ट्रांसफर कर देती थीं। छोटी बहन होने के नाते संगीत में भी उनका कद छोटा ही रहे, हमेशा बचा हुआ काम मिले, भला ये आशा जी को कैसे मंजूर होता।
तब ओपी नय्यर उनके जीवन में एक ऐसी सहर बनकर उभरे कि जीवन से सारे गिले शिकवे पीछे छूट गए।
आओ हुज़ूर तुमको, सितारों में ले चलें…
कजरा मुहब्बत वाला, अँखियों में ऐसा डाला…
आइए मेहरबान, बैठिए जानेजां…
ये रेशमी ज़ुल्फ़ों का अँधेरा न घबराइए…
मतलब क्या ही कमाल जोड़ी रही इन दोनों की… ओपी भी सनकी संगीतकार थे, क़सम खाई थी कि कभी लता के साथ गाना नहीं बनाऊँगा, नहीं बनाया। 15 साल तक आशा भोंसले का ऐसा साथ दिया कि पर्शिएलिटी का इल्ज़ाम लगने लगा। जो गाने गीता दत्त, शमशाद बेग़म या अन्य किसी सिंगर पर फिट हो सकते थे, वो भी आशा जी को देने लगे।
लता जी को ज़िंदगी में बेशुमार यश मिला, उनका नाम सदा इज़्ज़त से लिया गया। पर आशा जी की कहानी तो मसालों भरी थी न, उनको इज़्ज़त कमाने से पहले ढेरों लानतें बटोरनी पड़ीं।
पिता दीनानाथ मँगेश्कर के जाने के बाद मंगेशकर फ़ैमिली के सिर आर्थिक दुश्वारियाँ तो आई हीं, परिवार को एक रास्ते पर ले जाने वाली लीडरशिप भी खराब हो गई। लता जी तब 15-16 साल की ही तो थीं, जब उनको घर संभालने के लिए इंडस्ट्री में उतरना पड़ा।
वहीं बड़ी बहन से चार साल छोटी आशा भोंसले भी तब मात्र 16 साल की थीं जब लता जी के 36 वर्षीय सेक्रेटरी गणपतराव भोंसले से शादी करने के लिए उन्होंने घर ही छोड़ दिया।
जिस साल इतने बवाल के बाद शादी हुई, उसी साल पहला बेटा हेमंत भी हो गया! क्या लानतें मिली होंगी उन्हें उस वक़्त! अंदाज़ा लगाना भी कठिन है। लेकिन ये आनन-फानन की गई शादी कब रोज़ के लफड़े-झगड़े में बदल गई, आशा ताई को अंदाज़ा न हुआ।
1955 के आसपास उनकी ज़िंदगी में ओपी नय्यर के रूप में उन्हें जो म्यूज़िक डायरेक्टर मिला, वो किसी देवता से कम क्या लगता होगा! लेकिन म्यूजिक स्टूडियो के देवता के बाद घर पर पति के रूप में जो राक्षस था, उससे रिश्ता कमज़ोर होने लगा। भोंसले आशा जी को काम करते नहीं देख पा रहा था।
मात्र 10 साल चली इस शादी से जब तीसरी औलाद होने को थी, तब डमेस्टिक अब्यूज़ से परेशां होकर आशा ताई लौट आईं अपने घर और फिर कभी मुड़कर नहीं गईं। लेकिन तब के समय में शादी तोड़ने के बाद जो प्रताड़ना मिली होगी उन्हें, उसका आइडिया भी नहीं होगा आज किसी को।
शायद ये भी एक वजह थी कि लता और आशा के बीच प्रेम नगण्य होने लगा था।
पर अँधेरी रात की सुबह ओपी के संग हुई तो 15 साल चली, पर आखिर यहाँ भी रिश्तों में ब्रेक लगने ही थे क्योंकि ओपी पहले से शादीशुदा थे, सो ब्रेक लगे… आशा जी ने ओपी के साथ जो आखिरी गीत रिकार्ड किया था, उसके बोल बड़े दिलचस्प थे – “चैन से हमको कभी, आपने जीने न दिया, ज़हर भी चाहा अगर, पीना तो पीने न दिया”
ओपी नय्यर पर ज़बरदस्त किताब लिख चुके पराग डिमरी साहब बताते हैं कि इस गाने की रिकॉर्डिंग में आशा जी फूट-फूटकर रोई कि तब जो स्टूडियो से निकलीं तो फिर कभी ओपी से नहीं मिलीं।
क्योंकि फिर उनका साथ पंचम दा के साथ बनने लगा था। 1980 में आशा ताई ने पंचम दा से शादी कर ली। धीरे धीरे लता जी से भी उनके रिश्ते सुधरने लगे। आफ्टर ऑल, आरडी बर्मन की तो हर एल्बम में लता जी के गाने होते ही होते थे।
एक समय बाद तब की ग़लतियों पर आशा जी को बहुत पछतावा भी हुआ, ऐसा कई जगह सुनने को मिलता है।
क्या इत्तेफाक़ है कि चार साल पहले, लता जी भी 92 वर्ष की आयु में शरीर से मुक्त हुई थीं, आज आशा ताई की उम्र भी 92 वर्ष ही थी जब उनका देहावसान हुआ।
आज गिलेशिकवे, ओपी-आरडी सब पीछे रह गया…
इंडियन फ़िल्म्स के म्यूजिक में जो गोल्डन पीरीअड था, उसमें पाँच गायकों के नाम सबसे बड़े थे, जिनकी जगह कभी कोई न ले पाया; मुहम्मद रफ़ी, मुकेश, लता मँगेश्कर, किशोर कुमार और आशा भोंसले… आज उस आइकानिक ग्रुप का आखिरी पिलर भी ढह गया!
(सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’)



