India Vs Pakistan: याद पुरानी है पर बड़ी सुहानी है -जब पाकिस्तान में ही पाकिस्तान को धो दिया था भारत ने -हालांकि आसान नहीं था इस मैच को जीतना..
1997, भारत-पाकिस्तान के बीच वन दे मैच खेला गया कराची के नेशनल स्टेडियम में बहुत विकट परिस्थितियों में यह मैच खेला गया था। भारत को जीत के लिए 47 ओवर में 266 रन बनाने थे। पाकिस्तानी दर्शकों के उपद्रव के कारण चार बार मैच रोका गया था।
जब भारतीय टीम फील्डिंग कर रही थी तब उन पर उत्पाती दर्शकों ने पत्थर फेंके थे। स्थिति इतनी खराब हो गयी कि एक बार तो भारतीय टीम खेल का बहिष्कार करने के लिए मैदान से बाहर निकल गयी।
समय की खूब बर्बादी हुई। किसी तरह से मैच पूरा हुआ भारतीय टीम ने इस मैच को रोमांचक तरीके से जीत कर पाकिस्तानी दर्शकों की बोलती बंद कर दी स्टेडियम में सन्नाटा पसर गया जब रॉबिन सिंह ने विजयी शॉट मारा।
आइये अब देखते हैं किस तरह पाकिस्तानी बल्लेबाजी के बाद भारत ने 266 रनों ना-आसान लक्ष्य का पीछा करना शुरू किया था इस मैच में।
सौरव गांगुली और सचिन ने पारी शुरू की। सचिन 18 गेंदों पर 21 रन बना कर आउट हो गये। लेकिन गांगुली ने पिच पर लंगर डाल दिया। उन्होंने पाकिस्तान गेंदबाजों की अच्छी क्लास लगाई 96 गेंदों पर 89 रनों की पारी खेली। विनोद कांबली ने भी उनका अच्छा साथ दिया।
विनोद कांबली ने 53 रन बनाये। भारत का तीसरा विकेट 179 पर गिरा। मैच पर भारत की पकड़ मजबूत थी। लेकिन इसके बाद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा के विकेट जल्दी गिर गये। 195 के स्कोर पर 5 बल्लेबाज लौट चुके थे।
पाकिस्तान मैच में वापस आने लगा लेकिन भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज सबा करीम और रॉबिन सिंह ने एक बार फिर भारतीय पारी को जमाया। दोनों ने छठे विकेट के लिए 62 रनों की साझेदारी कर मैच का पलड़ा फिर भारत की तरफ झुका दिया।
257 के स्कोर पर सबा करीम को वकार यूनूस ने बोल्ड कर दिया। इसके बाद राजेश चौहान मैदान पर उतरे। भारत की पारी का यह 46 वां ओवर था। वकार के इस ओवर में एक गेंद और बाकी थी जो राजेश चौहान को खेलनी थी।
अब भारत को जीत के लिए 7 गेंद में 9 रन बनाने थे। वकार यूनुस का उस समय बड़ा खोफ था , राजेश चौहान ने वकार की अंतिम गेंद को बड़ी आसानी से खेलकर सिंगल ले लिया। सकलैन मुश्ताक 47वां ओवर फेंकने आये।
उस समय सकलेन की स्पिन गेंदबाजी का बड़ा जलवा था। उनकी स्ट्राइक राजेश चौहान के पास थी। सभी को उम्मीद थी कि चौहान एक रन लेकर स्ट्राइक रॉबिन सिंह को सौंप देंगे। रॉबिन सिंह उस समय भारत के मशहूर पावर हिटर थे और उनकी आंखें जमी हुई थीं।
रॉबिन सिंह 31 रनों पर बल्लेबाजी कर रहे थे लेकिन राजेश चौहान के दिमाग में कुछ अगल चल रहा था। इसी ओवर से जीत और हार का फैसला होना था इसलिए दबाव सकलैन पर भी था।उन्होंने ओवर की पहली गेंद फेंकी जो फुलटॉस हो गयी राजेश चौहान ने आगे बढ़ कर एक जोरदार शॉट खेला गेंद सीधा मिड विकेट बाउंड्री पर छक्के के लिए चली गयी।
उत्पात मचाने वाले पाकिस्तानी दर्शकों को जैसे सांप सूंघ गया। छक्का लगते ही पूरे स्टेडियम में खामोशी छा गयी। किसी को यकीन ही नहीं हो रहा था कि विश्वस्तरीय स्पिनर सकलैन को कोई पुछल्ला बल्लेबाज छक्का मार सकता है। लेकिन ये करिश्मा हो चुका था।
दूसरी गेंद को चौहान ने लेग साइड में विकेट के पीछे खेला चौहान एक रन के लिए दौड़ गये फील्डर ने तेजी से गेंद विकेटकीपर मोइन खान की तरफ फेंकी मोइन जब तक गिल्लियां बिखेरते तब तक रॉबिन सिंह एक जोरदार डाइव लगा कर क्रीज में पहुंच चुके थे। रनआउट के लिए थर्ड अंपायर के पास मामला गया रॉबिन नॉटआउट करार दिये गये।
अब जीत के लिए चार गेंदों पर एक रन चाहिए था। तीसरी गेंद पर रॉबिन सिंह ने एक रन लेकर भारत को एक रोमांचकारी जीत जीत दिला दी। सकलैन मुश्ताक ने कई साल बाद एक इंटरव्यू में कहा था, मैं राजेश चौहान को उस छक्के को कभी भूल नहीं पाया। इसकी टीस हमेशा मेरे दिल में रही।
(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल)



