Missing Child Found: पैरेन्ट्स रहिये सावधान ! – नोएडा स्कूल बस की लापरवाही से खो गया बच्चा – पिता ने लगा दी जान और ढूंढ निकाला अपने बच्चे को..
नोएडा के एक निजी स्कूल से ऐसी चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसने हर अभिभावक को हिला दिया। यूकेजी में पढ़ने वाला एक मासूम बच्चा लगभग सात घंटे तक स्कूल बस के अंदर बंद रहा और किसी ने उसकी सुध तक नहीं ली। स्कूल प्रशासन की लापरवाही साफ दिखी, लेकिन बच्चे के पिता ने हार नहीं मानी और सैकड़ों गाड़ियों के बीच अपने बेटे को खोज निकाला।
सुबह की शुरुआत और हादसे की नींव
दिन की शुरुआत सामान्य थी। छोटा बच्चा रोज़ की तरह स्कूल बस में बैठा। उस दिन उसकी बड़ी बहन साथ नहीं थी। बस में बैठते ही बच्चा सो गया। इसी बीच बस खराब हो गई और बाकी बच्चों को दूसरी बस में भेज दिया गया। सोए हुए बच्चे पर किसी का ध्यान नहीं गया। स्कूल पहुँचने पर सभी बच्चों को उतार दिया गया, लेकिन वह मासूम अंदर ही रह गया।
बस को बाद में सेक्टर-81 के एक बड़े यार्ड में खड़ा कर दिया गया, जो स्कूल से लगभग 25 किलोमीटर दूर था। उस यार्ड में करीब 600 ट्रक और 400 बसें खड़ी थीं। जब बच्चे की नींद खुली तो उसने खुद को अकेला पाया। चारों तरफ सन्नाटा था—न दोस्त, न शिक्षक, न कोई आवाज़। उसने मदद के लिए रोना-चिल्लाना शुरू किया, दरवाज़ा पीटा, लेकिन बंद एसी बस के भीतर उसकी आवाज़ दबकर रह गई।
घर पर बढ़ती चिंता
घर पर समय बीत रहा था। छुट्टी के बाद भी जब बच्चा घर नहीं पहुँचा तो माता-पिता की चिंता घबराहट में बदल गई। उन्होंने स्कूल से संपर्क किया, लेकिन सीसीटीवी और बस लोकेशन की लापरवाही के कारण दो से ढाई घंटे सिर्फ तलाश में ही निकल गए।
आखिरकार पिता खुद सेक्टर-81 के यार्ड पहुँचे। वहाँ सैकड़ों ट्रक और बसें खड़ी थीं। उन्होंने हर गाड़ी में तलाश शुरू की। सात घंटे की मशक्कत के बाद उन्होंने उस बंद बस को ढूँढ निकाला। अंदर उनका बेटा डरा-सहमा बैठा था, आँसुओं से भीगा चेहरा और सांस लेने में तकलीफ। उस पल पिता के लिए सब कुछ थम गया।
लापरवाहियों की श्रंखला
बस से उतरने के बाद अटेंडेंस रजिस्टर का मिलान नहीं किया गया।
सीसीटीवी मॉनिटरिंग में ढिलाई रही।
बस स्टाफ ने यह नहीं देखा कि बस पूरी तरह खाली हुई या नहीं।
बच्चा छह से सात घंटे तक बंद बस में रहा।
किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
माफी और कार्रवाई
स्कूल प्रबंधन ने संबंधित ट्रांसपोर्टर और बस स्टाफ को निलंबित कर दिया। प्रिंसिपल और वरिष्ठ स्टाफ ने माता-पिता से मिलकर माफी मांगी। स्कूल की प्रवक्ता सविता मेहता ने कहा कि कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। डीआईओएस राजेश कुमार सिंह ने भी स्कूल का निरीक्षण करने की बात कही।
लेकिन पिता के मन में अब भी वही सवाल है—क्या उनका बच्चा फिर कभी स्कूल बस में बैठते समय सुरक्षित महसूस कर पाएगा?
(अर्चना शैरी)



