PoK में भूख, गोलियां और बगावत, कश्मीर में विकास की नई उड़ान: 79 साल में LoC के दोनों ओर कैसे बदल गई तस्वीर?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में महंगाई, बिजली संकट और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात बिगड़ते जा रहे हैं, जबकि भारतीय जम्मू-कश्मीर रिकॉर्ड पर्यटन, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास की नई कहानी लिख रहा है। जानिए 79 वर्षों में LoC के दोनों ओर कैसे बदल गई तस्वीर।
एक तरफ विकास की रफ्तार, दूसरी तरफ भूख और बगावत: LoC के दोनों ओर कश्मीर की दो बिल्कुल अलग कहानियां
कश्मीर को कभी धरती का स्वर्ग कहा जाता था। आज भी यह इलाका दुनिया भर के लोगों को अपनी खूबसूरती से आकर्षित करता है। लेकिन इसी कश्मीर की कहानी नियंत्रण रेखा (LoC) के दोनों तरफ बिल्कुल अलग दिखाई देती है।
एक ओर भारत का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख है, जहाँ नई सड़कें बन रही हैं, सुरंगें तैयार हो रही हैं, पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़ पहुंच रही है और आर्थिक गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर यानी PoK है, जहाँ जनता महंगाई, बेरोजगारी, बिजली संकट और राजनीतिक दमन से जूझ रही है।
आज दोनों क्षेत्रों की स्थिति की तुलना करें तो यह साफ दिखता है कि पिछले 79 वर्षों में दोनों तरफ की तस्वीर किस तरह अलग-अलग दिशा में चली गई।
1947 से शुरू हुई कहानी
भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत था। उस समय महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय का फैसला किया। इसके बाद पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों ने कश्मीर में घुसपैठ की और संघर्ष शुरू हो गया।
भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन युद्धविराम लागू होने तक कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया। यही क्षेत्र आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर या PoK कहलाता है।
बाद के वर्षों में पाकिस्तान ने इस इलाके को प्रशासनिक रूप से अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया। इनमें तथाकथित “आजाद जम्मू-कश्मीर” और गिलगित-बाल्टिस्तान प्रमुख हैं। दूसरी ओर भारत ने अपने हिस्से के जम्मू-कश्मीर को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए।
आतंकवाद की चुनौती के बावजूद आगे बढ़ता जम्मू-कश्मीर
पिछले कई दशकों तक जम्मू-कश्मीर आतंकवाद की समस्या से जूझता रहा। सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों ने आम लोगों के जीवन को प्रभावित किया।
इसके बावजूद सुरक्षा बलों और प्रशासन ने हालात को धीरे-धीरे नियंत्रित किया। हाल के वर्षों में घाटी में सुरक्षा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
जो क्षेत्र कभी बंद, हड़ताल और पत्थरबाजी की खबरों के लिए सुर्खियों में रहते थे, वहाँ अब बाजार सामान्य रूप से चल रहे हैं। लोग अपने कारोबार पर ध्यान दे रहे हैं और युवा रोजगार तथा शिक्षा के नए अवसरों की ओर बढ़ रहे हैं।
पर्यटन ने बदली अर्थव्यवस्था की तस्वीर
शांति का सबसे बड़ा लाभ पर्यटन क्षेत्र को मिला है।
डल झील, पहलगाम, गुलमर्ग, सोनमर्ग और कई अन्य पर्यटन स्थलों पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। हर साल नए रिकॉर्ड बन रहे हैं।
पर्यटन बढ़ने से होटल उद्योग, टैक्सी सेवा, स्थानीय हस्तशिल्प, रेस्तरां और छोटे व्यापारियों को सीधा फायदा मिला है। हजारों परिवारों की आय में वृद्धि हुई है।
कई स्थानीय लोग बताते हैं कि अब पर्यटन सिर्फ एक मौसमी गतिविधि नहीं रहा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।
विकास परियोजनाओं ने बढ़ाई रफ्तार
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कई बड़ी आधारभूत परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
इनमें सबसे चर्चित परियोजनाओं में जोजिला सुरंग शामिल है। यह सुरंग लद्दाख और कश्मीर घाटी के बीच पूरे साल संपर्क बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण जो रास्ते महीनों बंद रहते थे, वे अब सालभर खुले रह सकेंगे।
इसके अलावा दुनिया के सबसे ऊँचे रेल पुलों में शामिल चिनाब रेल ब्रिज और जम्मू-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक जैसी परियोजनाएँ भी क्षेत्र की तस्वीर बदल रही हैं।
वंदे भारत ट्रेन के विस्तार से भी लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएँ मिलने की उम्मीद है।
रोजगार और निवेश के नए अवसर
बीते कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है।
सरकारी योजनाओं के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कई युवा अब स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यवसाय चला रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में सड़क, बिजली, इंटरनेट और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से लोगों के जीवन स्तर में भी बदलाव आया है।
दूसरी तरफ PoK में बढ़ती परेशानियां
जहाँ भारतीय कश्मीर विकास की बात कर रहा है, वहीं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालात काफी तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं।
मुजफ्फराबाद, रावलकोट, मीरपुर और गिलगित-बाल्टिस्तान सहित कई क्षेत्रों में लोगों ने महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और आवश्यक वस्तुओं की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक संकट का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में खाद्यान्न की उपलब्धता और कीमतों को लेकर भी असंतोष देखने को मिला है।
बिजली और संसाधनों को लेकर नाराजगी
PoK में विरोध प्रदर्शनों का एक बड़ा कारण बिजली से जुड़ा मुद्दा भी रहा है।
प्रदर्शनकारी आरोप लगाते हैं कि उनके क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग तो किया जाता है, लेकिन स्थानीय आबादी को उसका पर्याप्त लाभ नहीं मिलता।
महंगी बिजली, सीमित सुविधाएं और बढ़ती जीवन-यापन लागत लोगों की नाराजगी को और बढ़ा रही हैं।
राजनीतिक अधिकारों को लेकर उठ रहे सवाल
आर्थिक समस्याओं के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी लगातार चर्चा में है।
कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि क्षेत्र की राजनीतिक व्यवस्था में आम लोगों की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता।
विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों ने राजनीतिक सुधार, बेहतर प्रतिनिधित्व और स्थानीय अधिकारों की मांग उठाई है।
इन मुद्दों को लेकर समय-समय पर बड़े आंदोलन भी सामने आते रहे हैं।
गिलगित-बाल्टिस्तान में जनसांख्यिकीय बदलाव की बहस
गिलगित-बाल्टिस्तान लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है।
स्थानीय समूहों का दावा है कि वर्षों के दौरान क्षेत्र की जनसंख्या संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। कई सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इससे स्थानीय समुदायों की पहचान और राजनीतिक प्रभाव पर असर पड़ा है।
इन मुद्दों को लेकर क्षेत्र में समय-समय पर विरोध और असंतोष की घटनाएँ सामने आती रही हैं।
मानवाधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता
PoK में विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है।
इंटरनेट बंदी, गिरफ्तारियों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दों पर विभिन्न मंचों पर चर्चा हुई है।
भारत भी कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस विषय को उठाता रहा है और पाकिस्तान से जवाबदेही की मांग करता रहा है।
LoC के दोनों ओर दिख रहा बड़ा अंतर
आज नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ की तस्वीर देखने पर एक स्पष्ट अंतर नजर आता है।
भारतीय जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, सड़क, रेलवे, शिक्षा, स्वास्थ्य और निवेश से जुड़ी परियोजनाएँ तेजी से आगे बढ़ रही हैं। लोगों को विकास के नए अवसर मिल रहे हैं और क्षेत्र धीरे-धीरे आर्थिक मजबूती की ओर बढ़ रहा है।
वहीं PoK में आर्थिक संकट, राजनीतिक असंतोष और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठ रहे सवाल लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।
करीब आठ दशक बाद यह तुलना सिर्फ भूगोल की नहीं रह गई है। यह शासन, विकास मॉडल, बुनियादी सुविधाओं और आम नागरिकों के जीवन स्तर की तुलना भी बन चुकी है।
आज LoC के दोनों ओर मौजूद हालात दुनिया को यह दिखाते हैं कि नीतियों, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और विकास के दृष्टिकोण का किसी क्षेत्र के भविष्य पर कितना गहरा असर पड़ता है।
(त्रिपाठी पारिजात)



