रांची के मेसरा में बना जवाहर नवोदय विद्यालय – जहां पढ़ाई, खाना, रहना, यूनिफॉर्म सब बिल्कुल मुफ्त है। जंगल जैसा खूबसूरत कैंपस और टॉप क्वालिटी एजुकेशन। जानिए एडमिशन कैसे मिलेगा और तैयारी कहां से शुरू करें।
सोचो जरा – एक स्कूल जहां फीस जीरो। हॉस्टल फ्री। खाना फ्री। यूनिफॉर्म भी फ्री। और पढ़ाई का स्तर इतना ऊंचा कि बड़े-बड़े महंगे प्राइवेट स्कूल भी पीछे रह जाएं। सुनने में थोड़ा अजीब लगता है ना? पर यह सच है। और यह स्कूल है रांची के मेसरा में – जवाहर नवोदय विद्यालय।
यहां एडमिशन मिल जाए तो पेरेंट्स सच में प्रसाद चढ़ाते हैं। मजाक नहीं -बिल्कुल सच।
क्या मिलता है यहां बिल्कुल मुफ्त?
यह स्कूल सरकारी है। केंद्र सरकार चलाती है। तो यहां पढ़ने वाले बच्चों को जो सुविधाएं मिलती हैं वो किसी भी बड़े प्राइवेट स्कूल से कम नहीं – बल्कि कई मामलों में ज्यादा हैं।
रहना? फ्री। खाना? फ्री। और खाने की क्वालिटी भी अच्छी है – कोई भी घटिया मेस वाला खाना नहीं। स्कूल की यूनिफॉर्म? वो भी फ्री। हॉस्टल की सुविधा? बिल्कुल मुफ्त। और ट्यूशन फीस तो जीरो है ही।
कक्षा 6 से लेकर 10वीं तक – एक बार एडमिशन मिल गया तो पांच साल की पढ़ाई का पूरा बोझ सरकार उठाती है। पेरेंट्स को बस बच्चे को तैयार करना है।
कैंपस देखकर आंखें खुली रह जाएंगी
रांची का यह जेएनवी कैंपस सिर्फ स्कूल नहीं है – यह एक अनुभव है। चारों तरफ हरियाली। घने पेड़। ऐसा माहौल जैसे जंगल के बीच बैठकर पढ़ रहे हो। शहर के शोर से दूर, शांत वातावरण में बच्चे पढ़ते हैं – और इस माहौल में पढ़ाई की बात ही कुछ और होती है।
जो बच्चे यहां पढ़ते हैं वो बताते हैं कि इस कैंपस में आने के बाद मन खुद ही पढ़ाई में लग जाता है। ऐसा एनवायरनमेंट बहुत कम स्कूलों में देखने को मिलता है।
एडमिशन कैसे मिलेगा?
यहीं पर असली चुनौती है। एडमिशन आसान नहीं है। मिलता है – पर मेहनत के बाद।
कक्षा 6 में एडमिशन सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा कक्षा 9 और 11वीं में भी एडमिशन का मौका रहता है। पर जो मेन एंट्री है वो कक्षा 6 वाली ही है।
रांची के जाने-माने एजुकेशन एक्सपर्ट सतेंद्र कहते हैं – अगर बच्चे को नवोदय में भेजना है तो तीसरी क्लास से ही तैयारी शुरू कर दो। यह सुनकर थोड़ा ज्यादा लग सकता है। पर जब एग्जाम का पैटर्न समझोगे तो बात पूरी तरह समझ आएगी।
NCERT है असली हथियार
सतेंद्र साफ कहते हैं – यह सरकारी एग्जाम है। और सरकारी एग्जाम में सवाल सीधे NCERT से ही आते हैं। घुमाकर, पर आते NCERT से ही हैं।
तो करना यह है कि कक्षा 1 से लेकर 5वीं तक की NCERT की मैथ, साइंस और सोशल साइंस की किताबें – इन्हें अच्छे से पढ़ो। बैक क्वेश्चन हल करो। हर चैप्टर को पूरा पढ़ो और बीच में जो फैक्ट हैं उन पर खास ध्यान दो। कभी-कभी सवाल चैप्टर के बीच से ही उठा लिया जाता है।
और सबसे जरूरी – प्रैक्टिस और रिवीजन। जितना ज्यादा करोगे उतना अच्छा। मॉक टेस्ट दो। बार-बार दो। इससे बच्चे को असली एग्जाम का अंदाजा हो जाता है और घबराहट कम होती है।
हैंडराइटिंग भी जरूरी है!
एक बात जो अक्सर पेरेंट्स नजरअंदाज कर देते हैं – हैंडराइटिंग। सतेंद्र इस पर जोर देते हैं। लिखावट साफ और अच्छी होनी चाहिए। परीक्षा में यह छोटी सी बात बड़ा फर्क कर सकती है।
रोज सिर्फ एक घंटा – बस इतना काफी है
बच्चे पर ज्यादा बोझ मत डालो। सतेंद्र कहते हैं कि हर दिन बस एक घंटा अलग से निकालो – सिर्फ नवोदय की तैयारी के लिए। नियमित रहो। लगातार रहो। और NCERT पर भरोसा रखो।
तीसरी से पांचवीं तक की तैयारी सही रही तो एग्जाम पास करना मुश्किल नहीं रहेगा।
एक ऐसा स्कूल जहां पैसे की नहीं, मेहनत की जरूरत है। जहां जंगल के बीच बैठकर पढ़ाई होती है। जहां से निकले बच्चे आगे चलकर कुछ बड़ा करते हैं। रांची का यह जेएनवी उन लाखों परिवारों के लिए एक सपने जैसा है जो अपने बच्चे को अच्छी पढ़ाई देना चाहते हैं – पर जेब उतनी गहरी नहीं।
तो अगर आपका बच्चा तीसरी या चौथी में है – अभी से तैयारी कर लीजिये।
(अर्चना शैरी)



