Ranveer Singh के ऊपर साजिशाना तरीके से लगाये गये बैन से बॉलीवुड में मचा बवाल, संजय गुप्ता ने FWICE को घेरा, चंकी पांडे को याद आया अपना बैन..
रणवीर सिंह पर FWICE के नॉन-कोऑपरेशन निर्देश के बाद बॉलीवुड में बहस तेज हो गई है। मनोज बाजपेयी, संजय गुप्ता, चंकी पांडे और पूनम ढिल्लों ने मामले पर अपनी राय रखी। जानिए किसने क्या कहा।
रणवीर सिंह को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धीरे-धीरे पूरे बॉलीवुड में चर्चा का विषय बन गया है। फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़े मतभेदों के बीच फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) द्वारा जारी किए गए नॉन-कोऑपरेशन निर्देश ने इंडस्ट्री के कई बड़े नामों को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया है। कोई इस मामले के जल्द समाधान की बात कर रहा है तो कोई इस फैसले के असर को लेकर चिंता जता रहा है।
दरअसल, विवाद तब बढ़ा जब FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ असहयोग का निर्देश जारी किया। इसका मतलब यह है कि फेडरेशन से जुड़े कर्मचारी और तकनीशियन तब तक अभिनेता के साथ काम नहीं करेंगे, जब तक पूरा मामला सुलझ नहीं जाता। इस फैसले ने फिल्म इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है।
सबसे पहले इस मामले पर अभिनेता मनोज बाजपेयी की प्रतिक्रिया सामने आई। एक कार्यक्रम के दौरान उनसे रणवीर सिंह से जुड़े विवाद पर सवाल पूछा गया। मनोज ने कहा कि इंडस्ट्री के ज्यादातर लोगों को इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया और खबरों के जरिए मिली है, लेकिन हर किसी के पास पूरी जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि एक कलाकार और फिल्म उद्योग के सदस्य होने के नाते उनकी यही इच्छा है कि विवाद जल्द समाप्त हो और सभी पक्ष मिलकर समाधान निकालें। मनोज बाजपेयी का मानना है कि बिना पूरी जानकारी के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा, लेकिन इंडस्ट्री के हित में मामले का शांतिपूर्ण निपटारा जरूरी है।
वहीं निर्देशक संजय गुप्ता ने इस फैसले पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों का असर सिर्फ किसी बड़े अभिनेता पर नहीं पड़ता, बल्कि उन सैकड़ों लोगों पर भी पड़ता है जिनकी रोजी-रोटी फिल्म शूटिंग से जुड़ी होती है।
संजय गुप्ता ने लिखा कि जब कोई बड़ा स्टार किसी फिल्म की शूटिंग करता है तो सेट पर करीब 300 या उससे अधिक लोग काम कर रहे होते हैं। अगर अभिनेता पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो असल नुकसान उन तकनीशियनों, स्पॉट बॉय, लाइटमैन, मेकअप आर्टिस्ट और अन्य कर्मचारियों का होता है, जिनकी आय शूटिंग पर निर्भर करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह का कदम वास्तव में समस्या का समाधान है या फिर इससे और लोग प्रभावित होते हैं।
इस पूरे विवाद के बीच अभिनेता चंकी पांडे ने भी अपना पुराना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वह खुद भी एक समय ऐसे हालात का सामना कर चुके हैं। चंकी ने 1987 का एक किस्सा याद किया जब फिल्म इंडस्ट्री में हड़ताल चल रही थी और निर्माता पहलाज निहलानी ने ऊटी में फिल्म ‘आग ही आग’ की शूटिंग जारी रखी थी।
उस समय फेडरेशन इस फैसले से नाराज हो गया था और कुछ कलाकारों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। चंकी पांडे, जो उस दौर में नए कलाकार थे, उन्हें भी अस्थायी रूप से बैन का सामना करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि करीब एक सप्ताह तक उन पर प्रतिबंध रहा और बाद में माफी मांगने के बाद मामला खत्म हुआ।
चंकी पांडे ने यह भी कहा कि उस फिल्म में धर्मेंद्र और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े सितारे भी शामिल थे, लेकिन उस समय उनके पास कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स होने के कारण उन पर कार्रवाई नहीं की गई। अपने अनुभव का जिक्र करते हुए चंकी ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री बेहद संवेदनशील क्षेत्र है और किसी भी तरह का प्रतिबंध कई स्तरों पर असर छोड़ सकता है।
उधर सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) की अध्यक्ष पूनम ढिल्लों ने भी पूरे मामले पर निराशा व्यक्त की। उनका कहना था कि यह स्थिति थोड़ी असामान्य है क्योंकि रणवीर सिंह कलाकार समुदाय का हिस्सा हैं और ऐसे मामलों में बातचीत के जरिए समाधान निकालना ज्यादा बेहतर होता।
पूनम ढिल्लों के मुताबिक, न तो कलाकारों के संगठन को और न ही उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस विवाद की जानकारी पहले दी गई। उन्होंने कहा कि यदि मामला उनके संज्ञान में लाया जाता तो संभव है कि कलाकारों, निर्माताओं और फेडरेशन के बीच मध्यस्थता कर समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती थी।
उन्होंने यह भी कहा कि कलाकारों को अपने पेशेवर वादों और प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए। लेकिन यदि किसी वजह से समस्या पैदा होती है तो सभी पक्षों को साथ बैठकर रास्ता निकालना चाहिए। पूनम ने साफ किया कि उनके पास मामले की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए वह यह नहीं कह सकतीं कि कौन सही है और कौन गलत।
फिलहाल रणवीर सिंह और FWICE के बीच चल रहा यह विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इंडस्ट्री के अलग-अलग वर्गों से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और ज्यादातर लोग यही उम्मीद जता रहे हैं कि मामला बातचीत के जरिए जल्द सुलझ जाएगा।
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि फिल्म इंडस्ट्री में किसी कलाकार या प्रोडक्शन हाउस के खिलाफ लिए गए फैसलों का प्रभाव आखिर कितना व्यापक हो सकता है। एक तरफ अनुशासन और पेशेवर नियमों का सवाल है, तो दूसरी तरफ उन हजारों लोगों की आजीविका भी जुड़ी हुई है जो फिल्मों के निर्माण में पर्दे के पीछे काम करते हैं।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रणवीर सिंह, FWICE और संबंधित पक्ष इस गतिरोध को खत्म करने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं।
(अर्चना शैरी)




