US Israel Attack Iran: जिसकी आशंका थी वही हुआ..पिछले कुछ हफ्तों से चल रही अमेरिकी सैन्य सरगर्मियों ने अपने इरादे साफ कर दिये हैं..अब देखना ये है कि मिडिल ईस्ट में ये आग कितने देशों को अपनी चपेट में लेगी..
शनिवार तड़के अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया और कहा कि यह अभियान ईरान की “कट्टर और खतरनाक तानाशाही” को रोकने के लिए है ताकि अमेरिका और उसके राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहें। ट्रंप ने ईरान की सेना से हथियार डालने और नागरिकों से सरकार बदलने का आह्वान किया।
ईरान की प्रतिक्रिया और मिसाइल हमले
इज़राइल की सेना ने बताया कि ईरान ने कई मिसाइलें दागीं जिनका निशाना इज़राइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे। अमेरिकी नौसेना ने पहले ही दर्जनभर जहाज़ और विमान मध्य पूर्व में तैनात कर दिए थे। इससे पहले जून 2025 में ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले का आदेश दिया था।
ब्रिटेन का बयान
यू.के. सरकार ने कहा कि “ईरान को कभी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।” ब्रिटेन ने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने की बात कही और व्यापक युद्ध से बचने की अपील की।
न्यूयॉर्क में सुरक्षा बढ़ी
न्यूयॉर्क पुलिस विभाग ने संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाने का ऐलान किया। राजनयिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों पर अतिरिक्त गश्त लगाई गई है।
बहरीन में अमेरिकी दूतावास बंद
बहरीन की राजधानी मनामा में ईरानी मिसाइल हमलों के बाद अमेरिकी दूतावास ने रविवार को बंद रहने की घोषणा की। हमलों का निशाना अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कम से कम तीन मिसाइलें दागी गईं।
फ्रांस का रुख
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यह संघर्ष अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए “गंभीर परिणाम” ला सकता है। उन्होंने ईरान से परमाणु और बैलिस्टिक कार्यक्रम पर ईमानदार वार्ता करने की अपील की।
इराक में अमेरिकी ठिकाने पर हमला
इराक के एरबिल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागी गईं। वीडियो में दिखा कि अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई रॉकेट और ड्रोन को रोका।
ईरान का आरोप: स्कूल पर हमला
ईरान ने दावा किया कि अमेरिकी या इज़राइली हमले में दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर की एक लड़कियों के स्कूल पर बम गिरा, जिसमें 53 छात्राओं की मौत हुई। ईरान के विदेश मंत्री ने इसे “निर्दोष बच्चों की हत्या” बताया और संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई की मांग की। अमेरिका और इज़राइल ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की।
रूस का बयान
रूस ने अमेरिका-इज़राइल की कार्रवाई को “बिना उकसावे की सशस्त्र आक्रामकता” कहा और तुरंत हमले रोकने की मांग की। रूस ने आरोप लगाया कि असली मकसद शासन परिवर्तन है।
ओमान की नाराज़गी
ओमान के विदेश मंत्री, जो अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थता कर रहे थे, ने कहा कि हमले से शांति वार्ता को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई थी और यह एक बड़ी उपलब्धि थी।
बहरीन में लोगों की निकासी
बहरीन सरकार ने फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय वाले इलाके से नागरिकों को निकालना शुरू कर दिया। ईरान की तस्नीम एजेंसी ने पुष्टि की कि यह हमला ईरान की ओर से किया गया था।
सारांश में जानिये संपूर्ण घटनाक्रम को
अमेरिका-इज़राइल ने ईरान पर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू किया।
ईरान ने इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं।
ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और ओमान ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दीं।
बहरीन में अमेरिकी दूतावास बंद, फिफ्थ फ्लीट क्षेत्र खाली कराया गया।
ईरान ने दावा किया कि स्कूल पर हमले में 53 छात्राएँ मारी गईं।
(त्रिपाठी पारिजात)



