Liver Care: शराब नहीं पीते फिर भी खराब हो सकता है लिवर! जानिए ‘फैटी लिवर’ के बढ़ते खतरे और बचाव के आसान तरीके..
लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि लिवर से जुड़ी बीमारियां केवल उन लोगों को होती हैं जो शराब का अधिक सेवन करते हैं। लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। आज बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी लिवर की समस्या से जूझ रहे हैं जो कभी शराब नहीं पीते या बहुत कम पीते हैं। यानी लिवर की सेहत सिर्फ शराब पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई और बड़े कारण भी छिपे हैं।
असल में, आजकल जिस बीमारी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, उसे मेटाबोलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है। यह वही स्थिति है जिसे पहले फैटी लिवर के नाम से जाना जाता था। यह बीमारी तब होती है जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। धीरे-धीरे यह जमा फैट लिवर को नुकसान पहुंचाने लगता है।
जब लिवर में फैट बढ़ता है, तो सबसे पहले वहां सूजन (इन्फ्लेमेशन) शुरू होती है। इसके बाद लिवर के टिशू में निशान (फाइब्रोसिस) बनने लगते हैं। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह स्थिति सिरोसिस में बदल सकती है, जिसमें लिवर ठीक से काम करना बंद कर देता है। इस हालत में शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालना और जरूरी प्रोटीन बनाना मुश्किल हो जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, MASLD मुख्य रूप से हमारी आधुनिक जीवनशैली का नतीजा है। आजकल लोग ज्यादा समय बैठकर बिताते हैं, फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है और खाने में प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और मीठी चीजों की मात्रा बढ़ गई है। जब हम जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेते हैं, खासकर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के रूप में, तो शरीर इसे फैट में बदल देता है। यह फैट धीरे-धीरे लिवर में जमा होने लगता है।
मोटापा, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल भी इस बीमारी के बड़े कारण हैं। यही वजह है कि जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है, उनमें इसका खतरा अधिक होता है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह बीमारी सिर्फ मोटे लोगों तक सीमित नहीं है। कई बार सामान्य वजन वाले लोग भी इस समस्या का शिकार हो जाते हैं। इसे “लीन फैटी लिवर” कहा जाता है। इसका मतलब है कि सिर्फ वजन नहीं, बल्कि शरीर की मेटाबोलिक सेहत ज्यादा महत्वपूर्ण है।
इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती है। शुरुआत में मरीज को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। इसलिए इसे “साइलेंट डिजीज” भी कहा जाता है। कई बार यह बीमारी तब सामने आती है जब किसी अन्य कारण से हेल्थ चेकअप कराया जाता है और उसमें लिवर एंजाइम्स बढ़े हुए मिलते हैं या अल्ट्रासाउंड में लिवर में फैट दिखाई देता है।
अगर शुरुआती लक्षण दिखते भी हैं, तो वे बहुत हल्के होते हैं जैसे थकान महसूस होना, कमजोरी रहना या पेट के ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द या असहजता। ज्यादातर लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है।
अगर इस स्थिति का समय पर इलाज नहीं किया गया, तो यह आगे चलकर लिवर फेलियर या लिवर कैंसर तक का कारण बन सकती है। यही वजह है कि इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।
भारत जैसे देशों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने मोटापा और डायबिटीज के मामलों को बढ़ा दिया है। इसके साथ ही फैटी लिवर के केस भी तेजी से बढ़ रहे हैं। यह सिर्फ लिवर तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इससे दिल की बीमारी और अन्य मेटाबोलिक समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि अगर इस बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। इसके लिए दवाओं से ज्यादा जरूरी है जीवनशैली में बदलाव।
सबसे पहले, खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। संतुलित आहार लें जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हों। जंक फूड, तली-भुनी चीजें और ज्यादा मीठा खाने से बचें। इसके अलावा रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट तक व्यायाम करना बेहद फायदेमंद होता है। इससे वजन कंट्रोल में रहता है और लिवर पर दबाव कम पड़ता है।
ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित रखना जरूरी है। अगर किसी को डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो उसे नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज कराना चाहिए।
वजन को संतुलित रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है। धीरे-धीरे और स्वस्थ तरीके से वजन कम करना लिवर की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। अचानक और बहुत तेजी से वजन घटाना भी नुकसानदायक हो सकता है।
इसके अलावा, समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना चाहिए ताकि किसी भी समस्या का पता शुरुआती चरण में ही चल सके।
अंत में, यह समझना बेहद जरूरी है कि लिवर की बीमारी सिर्फ शराब पीने वालों तक सीमित नहीं है। आज के समय में यह एक आम समस्या बनती जा रही है, जो किसी को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए जागरूकता, समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाना ही इससे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
(डॉक्टर अनजानी)



