Mojtaba Khamenei: ईरान ने दावा किया है कि मोजतबा खामेनेई की तस्वीरें इसलिए जारी नहीं की जा रहीं क्योंकि उन पर काले जादू का खतरा है। जानिए इस अजीब दावे के पीछे क्या है सच्चाई और पूरी कहानी..
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की नई तस्वीरें या वीडियो जारी न करने के पीछे एक अजीब वजह बताई है। ईरानी नेताओं का कहना है कि उन्हें शक है कि मोजतबा खामेनेई पर ‘काला जादू’ किया जा सकता है, इसलिए उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
ईरान के एक सांसद सालार विलायतमादार ने इस मामले में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश के सुरक्षा अधिकारियों और धार्मिक विद्वानों ने मिलकर यह फैसला लिया है कि फिलहाल मोजतबा की कोई भी नई तस्वीर या वीडियो सार्वजनिक नहीं की जाएगी। उनका मानना है कि ऐसा करने से उनके खिलाफ किसी तरह की ‘गुप्त शक्तियों’ का इस्तेमाल किया जा सकता है।
विलायतमादार का दावा है कि इजरायल के कुछ शहरों, खासकर तेल अवीव में, ऐसे संस्थान मौजूद हैं जहां ‘गुप्त विद्याओं’ और जादू-टोने पर रिसर्च की जाती है। ईरान को डर है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल मोजतबा खामेनेई को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि उनकी तस्वीरों को सार्वजनिक करने से बचा जा रहा है।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर कई तरह की खबरें और अफवाहें फैल रही थीं। खासतौर पर 28 फरवरी को तेहरान में उनके परिसर पर हुए हमले के बाद से यह चर्चा और तेज हो गई थी।
बताया जाता है कि इस हमले के दौरान मोजतबा खामेनेई बाल-बाल बच गए थे। जब उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया, तो वे होश में थे और प्रार्थना कर रहे थे। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई थी। सिर्फ हल्की-फुल्की चोटें थीं, जिनसे वे अब पूरी तरह ठीक हो चुके हैं।
हालांकि, इस घटना के बाद ईरान की सरकार और सुरक्षा एजेंसियां काफी सतर्क हो गई हैं। उनका मानना है कि खतरा सिर्फ हथियारों से ही नहीं, बल्कि ‘अदृश्य शक्तियों’ से भी हो सकता है। इसलिए वे किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते।
ईरान में धर्म और राजनीति का रिश्ता बहुत गहरा रहा है। वहां के कई धार्मिक समूह ‘जिन्न’, ‘आत्माएं’ और ‘गुप्त शक्तियों’ के अस्तित्व पर विश्वास करते हैं। हालांकि, इन मान्यताओं को आमतौर पर व्यक्तिगत आस्था माना जाता है। लेकिन अब जब इन्हें सुरक्षा नीति से जोड़ा जा रहा है, तो यह दुनिया भर के विशेषज्ञों के लिए हैरानी की बात है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई लोग इस दावे को संदेह की नजर से देख रहे हैं। वैज्ञानिकों और विश्लेषकों का मानना है कि काला जादू जैसी चीजों का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। वहीं कुछ लोग इसे मनोवैज्ञानिक डर या राजनीतिक रणनीति भी मान रहे हैं।
दूसरी तरफ, ईरान के कुछ कट्टरपंथी गुट इस खतरे को गंभीर मानते हैं। उनका कहना है कि दुश्मन देश किसी भी तरीके से हमला कर सकते हैं, चाहे वह पारंपरिक हथियार हों या फिर कोई ‘गुप्त तकनीक’।
इस पूरे मामले ने मिडिल ईस्ट की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां आधुनिक युद्ध में तकनीक और हथियारों की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे दावे सामने आना कई सवाल खड़े करता है।
फिलहाल, मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा को लेकर ईरान पूरी तरह सतर्क है। उनकी गतिविधियों को सीमित रखा गया है और उनकी सार्वजनिक उपस्थिति पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि यह सब सिर्फ एहतियात के तौर पर किया जा रहा है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान अपने इस दावे पर कितना कायम रहता है और क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे गंभीरता से लेता है या नहीं। फिलहाल, यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों के बीच कई तरह के सवाल पैदा कर रहा है।
(अर्चना शैरी)



